वोट बैंक के लालच में ओबीसी आरक्षण के श्रेणीकरण में कई राज्य करते रहे हैं मनमर्जी, आयोग के ताजा आंकड़े कर देंगे हैरान

नई दिल्ली, सत्य पथिक न्यूज नेटवर्क: दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति जी. रोहिणी की अध्यक्षता वाले अखिल भारतीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वर्गीकरण आयोग की ताजा रिपोर्ट आपको जरूर चौंकाएगी। रिपोर्ट बताती है कि ओबीसी में शामिल 2600 में से 1000 से ज्यादा ऐसी जातियों को आरक्षण का एक भी लाभ नहीं मिल पाया है। आयोग अब इन्हीं तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर राज्यों के साथ निर्णायक चर्चा की तैयारी में है।

11 राज्यों के साथ निर्णायक चर्चा की तैयारी में आयोग

आयोग अगले महीने से देश के उन 11 राज्यों के साथ निर्णायक चर्चा शुरू करने की तैयारी में जुटा है, जो पहले से ही अपने यहां अलग-अलग आधार पर ओबीसी आरक्षण का बंटवारा कर चुके हैं। इन राज्यों में आरक्षण कोटे का बंटवारा किसी एक तय फार्मूले पर नहीं, बल्कि वोट बैंक के लिहाज से किया गया है। ऐसे में किसी राज्य में इसे दो श्रेणियों में बांटा गया है, तो किसी राज्य में तीन, चार और पांच श्रेणियों तक इसका बंटवारा किया गया है।

आयोग राज्यों पर बढ़ाएगा उप वर्गीकरण का दबाव

जस्टिस रोहिणी आयोग ताजे आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर ओबीसी आरक्षण के उप-वर्गीकरण (सब-कैटेगराइजेशन) के पक्ष में है। राज्यों के साथ इसी मुद्दे पर चर्चा करके वह उन पर जल्द सटीक उप वर्गीकरण कराने का प्रेशर डालेगा।

श्रेणियों पर अभी फैसला नहीं

रोहिणी आयोग के एक वरिष्ठ सदस्य के मुताबिक अभी हमने कोई श्रेणी नहीं बनाई है। कितनी श्रेणियां बनाना है, इस पर भी कोई फैसला नहीं लिया है। राज्यों से चर्चा के बाद ही इसका पूरा प्रारूप तय होगा। चूंकि राज्यों को इसे लागू करना है, ऐसे में उनकी राय जरूरी है।

ओबीसी आरक्षण पर कुंडली मारे बैठीं 100 जातियां

देश में फिलहाल ओबीसी की करीब 26 सौ जातियां हैं, जिनके लिए नौकरियों और दाखिले में 27 फीसद आरक्षण का प्राविधान है। बावजूद इसके पूरा आरक्षण ओबीसी की सिर्फ 600 जातियों में ही बंट जाता है। इनमें भी अधिक जनसंख्या वाली 100 से ज्यादा ऐसी जातियां है, जो आरक्षण  का आधे से ज्यादा लाभ ले रही हैं।

विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूटीं कई जातियां

गौरतलब है कि ओबीसी आरक्षण के बाद भी इसमें शामिल अनेक जातियां अभी भी विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूट गई हैं। मोदी सरकार ने वर्ष 2017 में

ऐसी जातियों को आगे बढ़ाने को आरक्षण का उप-वर्गीकरण कराने के उद्देश्य से जस्टिस जी.रोहिणी की अगुवाई में आयोग गठित किया है। जस्टिस जी.रोहिणी दिल्ली हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रह चुकी हैं।

इन 11 राज्यों में पहले से है ओबीसी का श्रेणीकरण

ओबीसी आरक्षण का वर्गीकरण देश के 11 राज्यों में पहले ही किया जा चुका है। हालांकि यह वर्गीकरण राज्य सूची के आधार पर किया गया है। जिन राज्यों में यह वर्गीकरण किया गया है, उनमें आंध्र प्रदेश, बंगाल, झारखंड, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी शामिल हैं।

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