सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/Climate Change: जलवायु परिवर्तन (Climate change) से जुड़े एक नए शोध अध्ययन (Reseach Study) से बहुत चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इस शोध अध्ययन में बताया गया है कि बहुत तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन (Climate change) को अभी रोका नहीं गया तो जल्दी ही पृथ्वी से 65 प्रतिशत कीड़े विलुप्त हो जाएंगे। साथ ही मानव का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा।

दरअसल, कीड़ों के विलुप्त होने से पृथ्वी पर अनंत काल से जारी संतुलन बिगड़ सकता है। इसका गंभीर प्रभाव इंसानों के अस्तित्व पर भी पड़ना तय है। कीड़े भले ही हमें परेशान करते हैं लेकिन बहुत से कीड़े किसानों के शत्रु ही नहीं, बल्कि मित्र भी होते हैं। वे फसलों के जमाव, पौधों की बढ़वार और उनमें फूलों-फलों-बीजों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। ये कीड़े हमारे लिए अनाज, फल, साग-सब्जियां आदि खाद्य पदार्थ उगाने में मदद करते हैं। लिहाजा पृथ्वी पर हमारी निरंतर उपस्थिति के लिए कीड़े सीधे तौर पर जरूरी हैं।
जलवायु परिवर्तन है घातक
लेकिन जलवायु परिवर्तन न केवल हमारे लिए, बल्कि कीड़ों के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है। स्टडी में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण 65 प्रतिशत कीड़े विलुप्त हो सकते हैं। यह रिसर्च स्टडी वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर क्लाइमेट चेंज’ में हाल ही में प्रकाशित हुई है। स्टडी में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कीटों की जिन 38 प्रजातियों का अध्ययन किया गया उनमें से 65 प्रतिशत पर अगले 50 से 100 वर्षों में विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।

इन कीड़ों की प्रजातियों पर खतरा
ठंडे खून वाले कीड़े जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं क्योंकि उनके पास बदलते बाहरी तापमान के अनुसार अपने शरीर के तापमान को बदलने की क्षमता नहीं होती। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस अनुसंधान का समर्थन किया है। नासा के एम्स रिसर्च सेंटर के एक पूर्व पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता डॉ. केट डफी ने इस शोध अध्ययन के बारे में बताया कि हमें यह समझने के लिए एक मॉडलिंग टूल की आवश्यकता थी कि तापमान में बदलाव से कीटों की आबादी कैसे प्रभावित होगी? इस माॅडलिंग टूल के जरिए पता लगा कि संपूर्ण फाइलम आर्थ्रोपोडा (सिर्फ क्रिटर्स को समूहीकृत करने वाला एक वैज्ञानिक शब्द) एक नाजुक संतुलन का हिस्सा है. इसके प्रभावित होने से पृथ्वी का संतुलन भी निश्चित रूप से बिगड़ेगा।
 

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