केंद्रीय उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने किया One Nation, One Fetilizer योजना का ऐलान

देश भर में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना और ढुलाई पर सब्सिडी घटाना है मक़सद

सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/One Nation, One Fetilizer: यूरिया और डीएपी सहित सब्सिडी वाले सभी उर्वरक अक्टूबर से सिंगल ब्रांड ‘भारत’ के नाम से बाजार में उतारकर बेचे जाएंगे। सरकार की इस कवायद का मक़सद किसानों को मिट्टी के पोषक तत्वों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराना और खाद ढुलाई पर सब्सिडी घटाना है।

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने उर्वरक सब्सिडी योजना ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना’ (पीएमबीजेपी) के तहत शनिवार को ‘वन नेशन वन फर्टिलाइजर’ योजना की घोषणा की।

केंद्रीय उर्वरक मंत्री श्री मंडाविया ने बताया कि पुराना स्टॉक खत्म करने के लिए कंपनियों को इस साल के अंत तक का समय दिया गया है। कंपनियों को उर्वरक के बैग के एक तिहाई हिस्से पर अपना नाम, ब्रांड, लोगो और अन्य संबंधित उत्पादों की जानकारी प्रदर्शित करने की अनुमति होगी। बाकी दो तिहाई हिस्से में भारत ब्रांड और पीएमबीजेपी का लोगो लगाना होगा।

सब्सिडी बिल बढ़कर 2.25 लाख करोड़ होने का अनुमान
पिछले वित्त वर्ष में केंद्र सरकार को 1.62 लाख करोड़ रुपये का उर्वरक सब्सिडी बिल झेलना पड़ा है। पिछले पांच-छह महीनों में संबंधित रसायनों की वैश्विक कीमतों में तेज वृद्धि देखते हुए सरकार का सब्सिडी बिल चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 2.25 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

मंडाविया ने इस योजना को शुरू करने के पीछे के तर्क को भी समझाया। कहा- सरकार यूरिया के खुदरा मूल्य पर 80 प्रतिशत, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) पर 65 प्रतिशत, एनपीके पर 55 प्रतिशत और पोटाश के म्यूरेट (एमओपी) पर 31 प्रतिशत सब्सिडी देती है। माल ढुलाई सब्सिडी भी सालानाना 6000-9000 करोड़ रुपये के बीच बैठती है।

खाद ढुलाई पर सब्सिडी का बोझ अझेल
मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों में उर्वरकों को समय पर पहुंचाने के लिए परिवहन पर भारी सब्सिडी देनी पड़ रही है। इफको और कृभको की उत्तर प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं लेकिन राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी अपने उत्पादों की बिक्री करती हैं। इसी तरह चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड की राजस्थान में इकाई है लेकिन वह मध्यप्रदेश में अपने उत्पाद बेचती है। नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड का कारखाना मध्यप्रदेश में है लेकिन उर्वरक की उत्तर प्रदेश में बिक्री करती है। यहां तक कि देश के पूर्वी क्षेत्र में पश्चिमी भारत से उर्वरकों की ढुलाई की जाती है।”

एकल ब्रांड पेश करने के पीछे यह है तर्क
मंडाविया ने कहा, एकल ब्रांड पेश करने की वजह साफ है। सरकार चाहती है कि कंपनियां अपने उर्वरकों को आसपास इलाकों में ही बेचें ताकि इनकी ढुलाई पर होने वाले खर्च और परिवहन पर देय भारी सब्सिडी को रोका जा सके।

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