बदायूं में कवि शैलेंद्र मिश्र देव के ग़ज़ल संग्रह का कई नामी साहित्यकारों की उपस्थिति में हुआ विमोचन, यादगार काव्य गोष्ठी में कवियों-शायरों ने भरे चटख रंग, बटोरी वाहवाही

सत्य पथिक वेबपोर्टल/बदायूं/literature: कवि शैलेन्द्र मिश्र ‘देव’ के ग़ज़ल संग्रह “गज़लों की छाँव में” का विमोचन भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कई राजनेताओं, दिग्गज साहित्यकारों और बहुत से गणमान्य नागरिकों एवं जिलास्तरीय अधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति में किया।

शहर में लावेला चौक के पास स्थित पारीवाल दुआ ब्राह्मण धर्मशाला में आयोजित विमोचन समारोह में भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि इस पुस्तक की सभी गज़लें बेहतरीन और समाज को दिशा देने वाली हैं। इनको पढ़कर एक सुखद अहसास होता है। पूर्व विधायक प्रेम स्वरूप पाठक ने कहा कि किसी भी कवि या लेखक की पुस्तक प्रकाशित होना उसके जीवन का सबसे बड़ा सपना और महान उपलब्धि होती है। मेरा आशीर्वाद है कि शैलेन्द्र नित नई उपलब्धि प्राप्त करें। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने कहा कि शैलेन्द्र को विभाग का एक होनहार शिक्षक बताया।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल ने कहा कि शैलेन्द्र मेरा सबसे कमजोर शिष्य था लेकिन इसने अपनी मेहनत और लगन से बड़ा मुकाम हासिल किया है। इसके लिए ढेर सारी बधाई। दिल्ली से आए कवि रंजीत शर्मा ‘रंग’ ने पुस्तक विमोचन के अवसर पर कवि शैलेन्द्र मिश्र ‘देव’ को अपनी संस्था द्वारा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य स्मृति सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में कारागार अधीक्षक विनय कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी शशांक शुक्ला, अशोक पाठक, भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष अमिता उपाध्याय ने भी उपस्थिति दर्ज कराई।

पुस्तक विमोचन के बाद यादगार कवि गोष्ठी भी हुई। कवयित्री अर्चना मासूम की सरस सरस्वती वंदना के बाद कवि आनंद पाठक ने समाज की विसंगतियों पर कुछ इस तरह चोट की-
कौन से मुँह से मियाँ हक़ की करेंगे बातें
भेड़ बकरी की तरह घेर के लाये हुए लोग।

शैलेन्द्र मिश्र ‘देव’ की रचनाओं पर काव्यप्रेमी श्रोता पूरे समय झूमते रहे –
देर लगी है माना हमने,
खूब मगर पहचाना हमने।
वो तो पूरा पागल निकला,
जिसको समझा दाना हमने।

कवि राजेश शर्मा ने कहा – बहुत बदनाम हूँ यारों कि मैं श्रंगार लिखता हूँ,
बसे नस नस में जो मेरे वही अशआर लिखता हूँ

कवि रंजीत ‘रंग’ ने पुस्तक विमोचन पर कुछ इस अंदाज में बधाई दी-
शैलेन्द्र जी को पुस्तक की लाखों बधाई हैं,
बड़ी मेंहनत से ये शुभ घड़ी आई है।

बरेली के चर्चित शायर ग़ज़ल राज ने अपने दमदार अशआर से महफिल लूट ली – जो दिल उनका शीशा अगर हो रहा है
ये उल्फत का मेरी असर हो रहा है

कामेश पाठक ने इन शब्दों से भगवान महाकालेश्वर की अर्चना की-
दीनों के हैं नाथ शम्भू त्रिपुरारी हैं।

शमशेर बहादुर ‘आँचल’ ने अपनी इन पंक्तियों पर सुधी श्रोताओं की खूब तालियां बजवाईं-

बड़ा वो है जिसे दुनिया बड़ा समझें बड़ा माने,
निराला नाम रखने से निराला कौन होता है।

बरेली से आये उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल ने इस ग़ज़ल पर खूब वाहवाही बटोरी –

ख़बर हो तुझको मेरा बुत तराशने वाले
खड़े हैं लोग मुझे फिर से मारने वाले

इनके अलावा सुनील शर्मा, पवन शंखधार, षट्वदन शंखधार,विष्णु असवा, उज्जवल वशिष्ठ, अजित सुभाषित, सरिता चौहान आदि ने भी अपना बेहतरीन काव्य पाठ किया।
इस अवसर पर पुष्पेंद्र शर्मा, देवेंद्र पाल मिश्रा, वासुदेव मिश्र, अवधेश पाठक, अनुज मिश्रा, अरविन्द दीक्षित, परमवीर, नितिन पटेल, दीपू यादव आदि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन सुनील शर्मा और पवन शांखधार ने किया।

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