सत्य पथिक वेबपोर्टल/चेन्नई/devision of Tamilnadu: द्रमुक सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा की ‘अलग द्रविड़नाडु’ की मांग के बीच भाजपा विधायक नैनार नागेंद्रन ने तमिलनाडु को दो राज्यों ‘पंडियानाडु’ और ‘पल्लनाडु’ में बांटने का मुद्दा उछालकर इस दक्षिणी राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है।

भाजपा विधायक नैनार नागेंद्रन

सियासी पंडितों की मानें तो दक्षिण भारत में कमल खिलाने का ख्वाब देख रही भाजपा को तमिलनाडु को दो हिस्सों में बांटे जाने के विवाद को हवा देने का सियासी फायदा मिलने के अच्छे आसार बन सकते हैं। बता दें कि तमिलनाडु के विभाजन के सवाल पर आगबबूला सत्ताधारी डीएमके पार्टी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए राजा और कुछ अन्य सत्ताधारी डीएमके नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ए राजा ने कहा है कि मोदी सरकार तमिलनाडु के विभाजन का बेमतलब का मुद्दा उछालकर को हमें भारत संघ से अलग होने की अपनी पुरानी मांग पर लौटने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। उन्होंने राज्य के सभी सियासी दलों से भाजपा और मोदी सरकार के इस विचार का व्यापक तौर पर विरोध करने की अपील भी की है।

इधर, द्रमुक सांसद ए राजा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी के विधायक नैनार नागेंद्रन ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा सोचते हैं तो तमिलनाडु को “दो हिस्सों में विभाजित” करने से कोई नहीं रोक सकता है।
भाजपा विधायक नैनार नागेंद्रन ने कहा कि बेहतर प्रशासन के लिए तमिलनाडु को दो राज्यों – ‘पंडियानाडु’ और ‘पल्ल नाडु’ में विभाजित किया जाना समय की मांग है।

नागेंद्रन ने दो संभावित राज्यों के बारे में बात करते हुए कहा, “तमिलनाडु में 234 विधायक हैं। राज्य के समग्र और तेज विकास के लिए इसे दो राज्यों में विभाजित करना ही सबसे बेहतर विकल्प है। विभाजन के बाद हर राज्य में 117 विधायक होंगे।उन्होंने कहा कि राजा की अलग राज्य की मांग तमिलनाडु के विभाजन से ही पूरी हो सकती है। उन्होंने दोनों संभावित दक्षिण और उत्तर तमिलनाडु राज्यों में भाजपानीत सरकारें बनने की भी उम्मीद जताई है।

मालूम हो कि बीती 3 जुलाई को नमक्कल में डीएमके सांसद ए राजा ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “हमें स्वतंत्र तमिलनाडु की मांग के लिए प्रेरित न करें। पेरियार और अन्ना द्वारा प्रचारित अलग द्रविड़नाडु की मांग जवाहरलाल नेहरू के जाने के बावजूद अब भी बनी हुई है। साल 1962 में डीएमके की इस मांग पर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने प्रतिबंध लगा दिया था जबकि डीएमके अलग द्रविड़नाडु की मांग पर डटी रही थी।

डीएमके सांसद राजा नमक्कल में द्रमुक लोकल बॉडी के मेंबर्स की बैठक में बोल रहे थे। विषय था- “मथियाल कूटाची, मानिलथिल सुयाची” (केंद्र में संघवाद और राज्यों के लिए स्वायत्तता)। ए राजा ने कहा- यही सोच दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की भी थी, जिसे पार्टी आज भी मानती है।
इस बीच डीएमके ने भाजपा विधायक नैनार नागेंद्रन के बयान की कड़ी आलोचना की है। राजा के अलावा डीएमके के एक अन्य सांसद टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि भाजपा इस समय “सत्ता के नशे में” है। इसीलिए जिस ऐसा बयान दे रही है।
एलंगोवन ने कहा, ” राज्य का विभाजन लोगों की मांगों पर आधारित होना चाहिए। आरोप लगाया कि मोदी सरकार मौका मिलते ही सत्ता की शक्ति का खुलकर दुरुपयोग कर सकती है।”

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