रबर फैक्टरी भूमि स्वामित्व मामले में बाम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें

सत्य पथिक वेबपोर्टल/बरेली/Rubber Factory’s Land Ownership Case: रबड़ फैक्टरी की भूमि के स्वामित्व को लेकर आज बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला उत्तर प्रदेश सरकार के पक्ष में नहीं आया तो भी स्थानीय जागरूक नागरिक चुप बैठने वाले नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय युवा वैश्य महासम्मेलन के बरेली जिलाध्यक्ष और जुझारू भाजपा नेता आशीष अग्रवाल ने फैसला सरकार के पक्ष में नहीं आने पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।

आशीष अग्रवाल ने बताया कि बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के बहुप्रतीक्षित फैसले में रबड़ फैक्टरी की 18 अरब रुपये की 1343 एकड़ बेशकीमती भूमि सरकार को वापस नही की गई तो वे बरेली के बहुमुखी विकास और बेरोगगारों-मजदूरों की हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने के लिए सुप्रीमकोर्ट में एक जनहित याचिका डालेंगे।

आशीष अग्रवाल

बताते चलें कि पिछले छह माह से व्यापारी नेता आशीष अग्रवाल केंद्र और प्रदेश सरकार के दो दर्जन मंत्रियों तथा भाजपा के राष्ट्रीय संगठन के शीर्ष नेताओं से मिलकर उत्तर प्रदेश सरकार की बेशकीमती भूमि को वापस लेने की प्रकिया में जिला प्रशासन पर लचर पैरवी का आरोप लगाते हुए केन्द्र के हस्तक्षेप से भूमि वापस लेने की गुहार लगा चुके हैं। आशीष ने दलील दी कि बैंकों ने जो भी लोन फैक्ट्री को दिया वह उसकी मशीनरी के औसत बाजार मूल्य और प्रबंधन की साख के आधार पर दिया था। सरकार द्वारा लीज पर दी गई भूमि से इस कर्जे का कोई लेना-देना नही था। सरकार ने प्रबंधन को केवल तीन लाख चालीस हजार रुपये में जमीन सशर्त लीज पर दी थी। लीज में साफ लिखा है कि 55 वर्ष अथवा फैक्ट्री के बन्द होने पर भूमि स्वत: सरकार को वापस हो जाएगी। बैंकों को अपना बकाया भुगतान लेना है तो मशीनरी उखाड़ कर ले जाएं या फैक्ट्री के प्रबंधन की सम्पत्ति नीलाम कर वसूली करें। किराएदार के लोन का भुगतान दुकान मालिक नहीं करता। अलकेमिस्ट कम्पनी एक ऐसी कम्पनी है जो देश मे करोड़ों अरबो के घाटे में डूबी फैक्ट्रियों व बैंकों के बकायादारों के बकाया का कुछ प्रतिशत हिस्सा जमाकर बड़ा मुनाफा खाती है। अलकेमिस्ट ने जो भी रुपया बैंकों में जमा किया है वह प्रबन्धन और बैंक के बीच का मामला है। अल केमिस्ट केवल इस आधार पर सरकार की भूमि पर कब्जा नहीं ले सकती है।

आशीष अग्रवाल ने दावा किया कि उनके द्वारा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मानवाधिकार आयोग तक इस प्रकरण को पहुँचाने के बाद ही प्रदेश और जिले के अधिकारी हरकत में आये हैं और जमीन वापसी को अब मजबूत पैरवी कर भी रहे हैं। उम्मीद है कि बाम्बे हाईकोर्ट का फैसला सरकार के हक में ही आएगा। 1343 एकड़ बेशकीमती जमीन सरकार को वापस मिलने पर यहां औद्योगिक सिडकुल जरूर बनेगा और बरेली सहित प्रदेश के युवाओं को रोजगार भी मिलेंगे। मजदूरों के बकाया भुगतान भी वही करेगा जिसका स्वामित्व जमीन पर रहेगा।

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