श्रीनगर/delimitation in J&K/सत्य पथिक न्यूज नेटवर्क: जम्मू-कश्मीर में विभिन्न क्षेत्रों से राजनीतिक पक्षपात दूर करने के मिशन को गति देने के लिए परिसीमन आयोग का बहुप्रतीक्षित चार दिवसीय दौरा आज मंगलवार से शुरू हो रहा है। इस दौरान परिसीमन आयोग क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय दलों की राय और प्रस्ताव सुनेगा। साथ ही अन्य सामाजिक संगठनों से भी मुलाकात करेगा। कुल 147 सियासी एवं सामाजिक प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए सुझाव देंगे।


जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर प्रदेश में विधानसभा गठन से पूर्व परिसीमन किया जाना है। इस प्रक्रिया के तहत जम्मू-कश्मीर में 107 विधानसभा क्षेत्रों को बढ़ाकर 114 किए जाने का प्रस्ताव है। परिसीमन आयोग का गठन के बाद जम्मू-कश्मीर का यह पहला दौरा है। आयोग ने जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिला उपायुक्तों से निर्वाचन क्षेेत्रों की पूरी जानकारी तलब की है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आज मंगलवार दोपहर को श्रीनगर पहुंचने के लगभग दो घंटे बाद डल झील किनारे स्थित हेरीटेज होटल में आयोग स्थानीय राजनीतिक दलों के साथ बैठक करेगा। बैठक की समय सीमा अंतिम तौर पर तय नहीं है। इसके अलावा राजनीतिक दल अलग-अलग भी मिल सकते हैं। इसके बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ भी आयोग के सदस्यों की एक बैठक होगी।

आयोग के सदस्यों की सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त

जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि परिसीमन आयोग के कश्मीर दौरे पर दुनिया की नजर लगी हुई है। इस दौरान आतंकी सुर्खियां पाने के लिए नापाक हरकत कर सकते हैं। इसलिए हमने सुरक्षा का पूरा बंदोबस्त किया है। सभी प्रमुख रास्तों पर नाके भी लगाए गए हैं। शरारती तत्वों की लगातार निगरानी की जा रही है।

मार्च 2022 तक बढ़ाया है आयोग का कार्यकाल

केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना देसाई के नेतृत्व में परिसीमन आयोग का गठन किया था। आयोग को इस वर्ष मार्च माह में काम पूरा करते हुए अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपनी थी। लेकिन कोरोना से उपजे हालात में आयोग काम पूरा नहीं कर पाया। लिहाजा इसका कार्यकाल एक साल के लिए छह मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया गया। आयोग में जम्मू कश्मीर के पांचों सांसद बतौर एसोसिएट सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें दो सांसद भाजपा और तीन नेशनल कांफ्रेंस के हैं। नेशनल कांफ्रेंस दिल्ली मे हो चुकी आयोग की एक बैठक का बहिष्कार कर चुकी है। अलबत्ता,अब वह परिसीमन की प्रक्रिया में हिस्सा लेने को तैयार है।

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