सत्य पथिक वेबपोर्टल/बरेली/court acquitted 8 student leaders: बरेली कालेज में 16 वर्ष पहले छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितताओं की आड़ में कथित तौर पर मारपीट, तोड़फोड़ और बलवा करने के आरोपी 8 छात्र नेताओं को सबूतों-गवाहों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने बुधवार को बरी कर दिया है।

कोर्ट का फैसला पक्ष में आने पर बरेली कचहरी में विक्ट्री मार्क दिखाते पूर्व छात्र नेता

ज्ञात रहे कि जनवरी 2006 में समाजवादी छात्र सभा (सछास) से जुड़े 8 छात्रनेताओं के विरुद्ध बरेली काॅलेज के तत्कालीन चीफ प्राक्टर डाॅ. जोगा सिंह होठी ने तोड़फोड़, कर्मचारियों के साथ मारपीट, सरकारी काम में बाधा डालने, धमकी देने आदि धाराओं में बारादरी थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।

डाॅ. होठी ने थाने में तहरीर देकर बताया था कि 19 जनवरी 200़6 की शाम 4ः45 बजे कालेज के छात्रवृत्ति कार्यालय में लिपिक प्रमोद कुमार, सहायक लिपिक पंकज अग्रवाल छात्रवृत्ति संबंधी कार्य कर रहे थे, तभी आरोपीगण कार्यालय में आये तथा प्रमोद कुमार व पंकज से गाली गलौज करने लगे। दोनों लिपिक जान बचाकर भागे तो जान से मार डालने की धमकी दी।

पुलिस ने हजियापुर निवासी तत्कालीन समाजवादी छात्र सभा जिलाध्यक्ष चन्द्रभान पटेल उर्फ पाल, दिलीप सिंह, जमुना प्रसाद, ओमकार सिंह, वर्तमान पार्षद गौरव सक्सेना, लोकेश चन्द्र, कर्मचारी नगर निवासी रविन्द्र गंगवार, जगतपुर निवासी विनय पाल सिंह आदि छात्रनेताओं के विरूद्व रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट भेजा था।

पुलिस ने चार्जशीट में 19 गवाह बनाए थे लेकिन इनमें से कई कर्मचारी कोर्ट में गवाही होने से पहले ही रिटायर हो गए और कुछ की मृत्यु हो गयी थी। केवल 7 गवाह ही कोर्ट में गवाही देने आ सके। वे भी कोर्ट में गवाही के दौरान पुलिस को दिए बयान से मुकर गए। इस केस के वादी चीफ प्रॉक्टर स्व. डाॅ. जोगा सिंह भी मृत्यु पूर्व छात्र नेताओं के पक्ष में अपने बयान दर्ज करा गए थे। कोर्ट ने अपने आदेश में भी उल्लेखित किया कि साक्षीगण ने ही अपनी गवाही में अभियोजन का समर्थन नहीं किया है। लिहाजा साक्ष्य के अभाव में और संदेह के आधार पर सभी आरोपी दोषमुक्त किये जाते हैं।

सच्चाई की हुई जीत, मिला न्याय

दोषमुक्त होने पर पार्षद गौरव बोले-
मुकदमे से दोषमुक्त होने पर खुशी जताते हुए वर्तमान में समाजवादी पार्टी के महानगर महासचिव पार्षद गौरव सक्सेना ने कहा कि 16 वर्ष पूर्व बरेली कॉलेज में किये गये प्रदर्शन के उपरांत कालेज प्रशासन द्वारा लिखाए गए मुकदमे में कोर्ट द्वारा दोषमुक्त किये जाने पर सच्चाई की जीत हुई है, हमें न्याय मिला है।
उस समय बरेली कालेज मे छात्रवृत्ति में काफी धांधली व्याप्त थी। कर्मचारी नियमों का पालन किये बिना अपने चहेते छात्रों को स्कॉलरशिप का लाभ दिलवा देते थे जबकि पात्र लाभार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पा रही थी। शिकायत के बाद समाजवादी छात्र सभा के बड़े आंदोलन का ही असर था कि कालेज में छात्रवृत्ति में व्याप्त धांधली समाप्त हुई थी तथा नियमानुसार छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने लगी थी। लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद इस बात का संतोष है कि उस समय छात्रहित में लड़ी गई छात्रों की लड़ाई सफल हुई थी और हमें अब न्याय मिला है।

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