नागपुर में एक कार्यक्रम में बोले नितिन गडकरी, कहा-कानून जनहित में बाधक बनें तो तोड़ देने चाहिए
सत्य पथिक वेबपोर्टल/नागपुर-महाराष्ट्र/Nitin Gadkari’s mind blowing statement: खरी बात कहने के लिए चर्चित केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अब कहा है कि सरकारें नौकरशाहों के इशारे पर नहीं चलनी चाहिए। गरीब-जरूरतमंदों की भलाई के लिए सरकार और मंत्रियों को कानून तोड़ने भी पड़ें तो गलत नहीं है।

नागपुर में महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेस के एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून गरीबों की भलाई के काम में बाधक नहीं बनना चाहिए।

अपनी साफगोई के लिए प्रसिद्ध केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जोर देकर कहा, ‘।पब्लिक की भलाई के कामों में अगर कोई कानून बाधक बन रहा हो तो सरकार और मंत्री को ऐसे कानून को तोड़ने का पूरा हक है। अधिकारियों को सिर्फ ‘हां’ कहना चाहिए।’ 

नितिन गडकरी ने साफ किया कि सरकार को कानून तोड़ने या किनारे करने का अधिकार है-ऐसा मैं नहीं कह रहा, महात्मा गांधी भी अक्सर यही कहा करते थे। गांधीजी कहते थे, यदि कानून गरीबों के विकास का रास्ता रोकें तो उन्हें तोड़ देना चाहिए।नौकरशाह जो कहें, उसके मुताबिक सरकार को नहीं चलना चाहिए। 

सरकार नौकरशाहों के इशारे पर नहीं अपने हिसाब से चलेगी
केंद्रीय मंत्री ने 1995 में महाराष्ट्र की मनोहर जोशी सरकार में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उन्होंने एक समस्या को कैसे हल किया था। गडकरी ने कहा, ‘मैं हमेशा नौकरशाहों से कहता हूं कि सरकार आपके कहने के अनुसार काम नहीं करेगी। आपको केवल ‘हां सर’ कहना है। आपको हम मंत्री जो कह रहे हैं उसे लागू करना होगा। सरकार हमारे हिसाब से काम करेगी।’  गडकरी ने आगे कहा, ‘मैं जानता हूं कि गरीबों के कल्याण के रास्ते में किसी कानून को बाधक बनने नहीं दिया जा सकता है। अगर इस तरह के कानून को 10 बार भी तोड़ना पड़े तो महात्मा गांधी ने जो कहा है, उसमें हमें संकोच नहीं करना चाहिए।’

उन्होंने बताया कि कैसे 1995 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली व मेलघाट क्षेत्र में हजारों आदिवासी बच्चे कुपोषण के कारण मर गए थे और गांवों में सड़कें नहीं थीं। वन कानून (forest laws) सड़कें बनाने में आड़े आ रहे थे। उन्होंने इसका जिक्र करते हुए व्यापक जनहित में और जनता की भलाई के लिए ऐसे कानून तोड़ने या उन्हें दरकिनार करने की बात कही है। 

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