सत्य पथिक वेबपोर्टल/वाराणसी/Gyanwapi case: ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और अन्य देव विग्रहों को संरक्षित करने के मामले में ग्रीष्मावकाश के बाद सोमवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई हुई। राखी सिंह समेत पांच महिलाओं की तरफ से यह वाद दाखिल कराया गया है। आज मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में अपनी दलीलें रखीं। लगभग सवा घंटे सुनवाई चली। दलीलें अधूरी रहने पर अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 12 जुलाई तय कर दी है। 

अदालत में ऑर्डर 7 रूल 11 के  तहत वाद सुनवाई योग्य है, या नहीं- इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला एवं सत्र न्यायालय में बहस हो रही है। सोमवार को मुस्लिम पक्ष अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से अधिवक्ता अभय यादव ने कुल 52 में से 39 बिंदुओं पर कोर्ट में दलीलें दीं। 

हिंदू पक्ष के वकील के अनुपम द्विवेदी ने बताया कि अगली तारीख पर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की दलीलें पूरी हो जाएंगी। इसके बाद हम दलीलें देकर साबित करेंगे कि वाद पोषणीय है और इस मामले में विशेष धर्म उपासना स्थल विधेयक 1991 लागू नहीं होगा।

लगभग सवा घंटे चली सुनवाई में अंजुमन की तरफ से अधिवक्ता अभयनाथ यादव के अलावा रईस अहमद, मुमताज अहमद, अखलाक अहमद, मिराजुद्दीन सिद्दीकी और पांच वादी महिलाओं की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन, मानबहादुर सिंह, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी, अनुपम द्विवेदी समेत अदालत कक्ष में 50 लोगों को जाने की अनुमति थी।

अदालत कक्ष के बाहर काफी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। इधर, वादी राखी सिंह की तरफ से अधिवक्ता हरिशंकर जैन, सुधीर त्रिपाठी, सुभाष नंदन चतुर्वेदी और मदनमोहन यादव को हटाने के लिए आवेदन दिया गया। कोर्ट में वादिनी राखी सिंह के पैरोकार जितेंद्र सिंह विसेन और अन्य वादिनीगण भी मौजूद रहे।
 

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