सत्य पथिक वेबपोर्टल/जयपुर-जैसलमेर: Rajasthan Congress Crisis: राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए जबरदस्त खींचतान के बीच रविवार देर रात कांग्रेस विधायकों की बैठक रद्द कर दी गई है। सीएम के मुद्दे पर गहलोत समर्थक 82 विधायकों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि पायलट को सीएम पद सौंपे जाने के फैसले से आलाकमान ने उनकी राय नहीं ली है।

गहलोत खेमे के विधायकों ने कांग्रेस विधायक दल की रविवार शाम होने वाली बैठक रद्द करने का ऐलान करते हुए बताया है कि हम सभी 82 विधायकों ने अपने इस्तीफे विधायक शांति धारीवाल के आवास पर जाकर दे दिए हैं। इन्हें स्पीकर को सौंपा जाएगा।

गहलोत गुट के विधायकों ने राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के सामने भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आलाकमान हमारी बात नहीं सुनेगा तो हम सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। विधायक शांति धारीवाल के घर से रविवार देर रात एक बस विधायकों को लेकर निकली। धारीवाल के आवास पर इस्तीफा सौंपकर विधायक सीपी जोशी के घर की तरफ चले गए।
मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने 92 विधायकों द्वारा इस्तीफा दे देने का दावा करते हुए कहा कि सभी विधायक इस बात से भी खफा हैं कि सीएम अशोक गहलोत उनसे सलाह किए बिना फैसला कैसे ले सकते हैं? इसीलिए हम सब इस्तीफे देने के लिए पार्टी अध्यक्ष के पास जा रहे हैं।

विधायक दल की बैठक से पहले गहलोत ने कहा, “ऐसी अफवाह फैलाई गई कि मैं CM पद नहीं छोड़ना चाहता, जबकि मैं तो 9 अगस्त को ही इस पर अपनी राय स्पष्ट कर चुका हूं।” सूत्रों के मुताबिक इस बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अशोक गहलोत को फोन किया और स्थिति संभालने के लिए कहा, लेकिन गहलोत ने साफ कह दिया कि अब उनके बस में कुछ नहीं है।

राजेंद्र गुड़ा ने कहा है कि अगर सभी 101 विधायक भी बैठक में शामिल नहीं होते हैं तो क्या सरकार बहुमत नहीं खोएगी? मैं इस बैठक में शामिल नहीं हो रहा हूं। मेरे घर में कुछ विधायक हैं। इससे पहले सीएम अशोक गहलोत ने राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा।

बसपा छोड़कर कांग्रेस में आए मंत्री राजेंद्र गुड़ा ने कहा है कि निर्दलीय विधायक तो कुछ भी कह सकते हैं। लेकिन वे पार्टी आलाकमान के साथ हैं।

अशोक गहलोत के समर्थकों ने अभी से बगावती सुर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बैठक से पहले कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा है कि विधायकों ने अशोक गहलोत को ही अपना नेता माना है। इससे पहले निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने गहलोत को ही सीएम बनाए रखने की मांग की। उन्होंने कहा है कि अगर विधायकों की इच्छा के आधार पर ही मुख्यमंत्री का चयन होता है तो सरकार ठीक तरह से चलती रहेगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार गिरने का खतरा है।

लोकदल कोटे से राज्यमंत्री और गहलोत के करीबी डॉ. सुभाष गर्ग ने पायलट का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। गर्ग ने कहा, ‘जिन लोगों (पायलट) ने 2 साल पहले सरकार गिराने की कोशिश की, उन्हें प्रदेश की कमान सौंपने की तैयारी की जा रही है। इससे पार्टी और सरकार दोनों कमजोर हो सकते हैं।’
सहयोगी दलों से भी पूछा जाना चाहिए।

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