अग्नि-5 अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइल कार्यक्रम की डायरेक्टर और फाइटर जेट ‘तेजस’ अनुसंधान टीम का भी रही हैं हिस्सा

सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/Missile Lady of India: परंपरागत दक्षिण भारतीय साड़ी और माथे पर चंदन की बारीक रेखा- पहली नज़र में डाॅ. श्रीमती टेसी थाॅमस को देखकर कोई यह सोच भी नहीं सकता है कि यही वह महाशक्तिमान महिला हैं जिन्होंने चीन-पाकिस्तान जैसे परंपरागत दुश्मनों को उनकी छठी का दूध याद दिलवाने वाले अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइल अग्नि-5 प्रोजेक्ट को हकीकत की धरती पर उतार दिखाया है।

भारत के सामरिक परमाणु अभियान के जनक मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानने वाली भारत की मिसाइल महिला डाॅ. टेसी थामस ने इस धारणा को सच कर दिखाया है कि अगर कोई महिला ठान ले तो उसके लिए कुछ भी करना नामुमकिन नहीं है। वह आज कई महिलाओं और लड़कियों के लिए एक प्रेरणा हैं।

डाॅ. टेसी थॉमस को मिसाइल वुमन और डाॅ. भारत की अग्निपुत्री के नाम से भी जाना जाता है… और ये नाम उनको दुश्मनों को परास्त करने वाले अग्नि मिसाइल के निर्माण के बाद मिले हैं। वह अपने इस कार्य में साल 1998 से लगी हुई हैं, और अब तक वह अग्नि – 2, अग्नि -3, अग्नि – 4, अग्नि – 5 की टीम का हिस्सा बनकर देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद ही सफल अभियान का संचालन करती रही हैं। डाॅ. टेसी थामस के निर्देशन में तैयार की गई अग्नि – 5 अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइल 5500 से आठ हजार किलोमीटर तक जाकर दुश्मन टार्गेट को तबाह कर सकती है। टेसी थॉमस ने मिसाइल अनुसंधान और डिजाइन के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करते हुए देश की सुरक्षा में यकीनन अद्भुत और अद्वितीय योगदान दिया है। 

बताते चलें कि इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का अनुसंधान करने वाले दुनिया के चुनिंदा बड़े वैज्ञानिकों में शुमार डाॅ. टेसी थॉमस भारत की रक्षा के अहम हिस्से फाइटर जेट तेजस को तैयार करने वाली टीम में भी रह चुकी हैं। 
टेसी थॉमस का जन्म, अप्रैल 1963 में केरल के अलप्पुझा जिले में, एक सीरियाई ईसाई परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता ने उनका यह नाम मदर टेरेसा से प्रभावित होकर रखा था। जब वे 13 वर्ष की थीं तब उनके पिता को स्ट्रोक पड़ा जिस वजह से उनके शरीर के दाएं भाग में पक्षाघात (लकवा) हो गया था। टेसी की माँ, जो कि अध्यापिका थीं, ने इस हादसे के बाद परिवार की देख-भाल की। टेसी की चार बहनें और एक भाई है, और इनके माता-पिता ने सारे बच्चों की बेहतरीन पढ़ाई का हमेशा बहुत ख्याल रखा जिसकी वजह से टेसी एक साइंटिस्ट बन पाईं। टेसी की मां उन्हें डॉक्टर बनाना चाहती थी, लेकिन टेसी की रुचि हमेशा से गणित और साइंस में रही। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं।

डाॅ. टेसी का बचपन थुम्बा राॅकेट स्टेशन के निकट बीता और प्रक्षेपास्त्रों में उनकी रुचि वहीं से पैदा हुई। इनकी प्रारंभिक शिक्षा सेंट माइकल हायर सेकेंडरी स्कूल और सेंट जोसेफ गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में पूर्ण हुई। उनको 11वीं और 12 वीं कक्षा में गणित में 100/100 अंक मिले थे तो विज्ञान में भी निन्यानबे प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए थे। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने त्रिशूर के सरकारी अभियंत्रिकी कॉलेज से पूरी की। इस पढ़ाई को जारी रखने के लिए उन्हें भारतीय स्टेट बैंक से प्रति माह 100 रुपये का शिक्षा ऋण भी लेना पड़ा था।
टेसी थामस ने इंस्टिट्यूट ऑफ आरमामेंट टेक्नोलोजी, पुणे से एम॰ टेक किया है और डीआरडीओ के तहत मार्गदर्शन मिसाइल में ऑपरेशंस मैनेजमेंट में एमबीए और पीएचडी डिग्री हासिल की है। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि डीआरडीओ के इस कोर्स का विज्ञापन एक अखबार में देखा था और उन्होंने कभी भी डिफेंस में आने का नहीं सोचा था, यह इसे किस्मत की मेहरबानी मानती हैं। 

डॉ. टेसी थॉमस ने 1988 में डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन) में शामिल हो गईं थी, जहां पर उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के अधीन काम किया। उनको सबसे पहले नई पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि के डिजाइन और विकास विभाग में रखा गया था। अग्नि कार्यक्रम के लिए, टेसी की नियुक्ति खुद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी। 
टेसी 3,000 किमी की दूरी की अग्नि- 3 मिसाइल परियोजना की सहयोगी परियोजना निदेशक रह चुकी हैं। वह बतौर परियोजना निदेशक मिशन अग्नि – 4 में भी काम कर चुकी हैं, जिसका 2011 में सफल परीक्षण किया गया था। उनको 2009 में 5,000 किमी रेंज की अग्नि- 5 मिशन परियोजना के लिए निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था, और इस मिसाइल का 19 अप्रैल 2012 को सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया था। वर्ष 2018 में उन्हें डीआरडीओ के एयरोनॉटिकल सिस्टम के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया।

स्वविकसित जेट फाइटर के नाम पर Tejas रखा है बेटे का नाम

Light Combat Aircraft Jet Fighter Tejas एलसीए जेट फाइटर तेजस को विकसित करने वाली टीम का भी हिस्सा रही हैं। समर्पण भाव देखिए कि अपने बेटे का नाम भी डाॅ.टेसी थॉमस ने तेजस Tejas रखा है।

स्वदेशी REVS रक्षा तकनीकी भी विकसित की

डाॅ. टेसी की ही देखरेख में बेहद महत्वपूर्ण मिसाइल तकनीक ‘Re Entry Vheical System’ (आरईवीएस) का भी स्वदेश में ही विकास संभव हो सका है। यह ऐसी रक्षा तकनीकी है जो भारत को विश्व के एक-दो देशों के पास ही होने पर इसलिए उपलब्ध नहीं हो पा रही थी कि उन देशों ने पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद भारत की कई प्रयोगशालाओं के प्रयोगों को उपकरण और तकनीक देने के लिए प्रतिबंध लगा दिए थे। यह अत्याधुनिक आरईवीएस तकनीक मिसाइल को विपरीत मौसम की परिस्थितियों में भी अनुकूल बना देती है और 3000 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान में भी मिसाइल को सक्रिय और अचूक निशाने तक पहुंचने से नहीं रोक सकती है। यह तकनीक लम्बी दूरी की मिसाइल को वायुमंडल से बाहर जाकर फिर से वायुमंडल में आकर अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम बनाती है, जिससे शत्रु को मौसम ख़राब होने पर भी सर्दी, गर्मी और बरसात के किसी भी मौसम में उसी के पाले में जाकर सबक सिखाया जा सके।
टेसी को इस क्षेत्र में सफल और आगे बढ़ने की प्रेरणा भारत के मिसाइल मैन डाॅ. एपीजे अब्दुल कलम ने दी थी, इसलिए वह कलाम को अपने करियर का प्रेरणादायक इंसान और अपना गुरु मानती हैं। 

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