विभिन्न विधाओं में प्रकाशित हो चुके हैं आधा दर्जन काव्य संग्रह
कवि गोष्ठी आयोजन समिति के बैनर तले साढ़े तीन दशक से लगातार कराते रहे हैं मासिक काव्य गोष्ठियां

गणेश ‘पथिक’
वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार

सत्य पथिक वेबपोर्टल/बरेली/साहित्य: 12 अगस्त 2022 को जीवन की हीरक जयंती मना रहे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ का बरेली के समकालीन कवि-शायर-साहित्यकारों के बीच निर्विवाद रूप से मूर्धन्य स्थान है। कविताई उन्हें पैतृक विरासत में मिली है। पिता स्वर्गीय देवी प्रसाद गौड़ ‘मस्त’ भी चर्चित कवि रहे हैं।

बरेली के मोहल्ला साहूकारा में हाथी वाले मंदिर के पास रह रहे रणधीर गौड़ ‘धीर’ का साहित्य रचना संसार बहुत व्यापक और समृद्ध है। उनकी लेखनी परंपरागत छंद, सवैया, घनाक्षरी, कुंडलियां से लेकर दोहा, गीत, खयाल, खमसा, हिंदी-उर्दू ग़ज़ल हर क्षेत्र में खूब चली है। श्रंगार का संयोग पक्ष लिखते हैं तो प्रेमी युगल के मनोभावों और रससिक्त अनुभूतियों का सजीव चित्र सा उकेरते चलते हैं और जब विरह का वर्णन करते हैं तो हर किसी की आंखें डबडबा जाती हैं। गौड़ साहब भक्ति, वीर, ओज, करुण से लेकर हास्य-व्यंग हर रस में रची-बसी यादगार रचनाएं रचने और गहराई में डूबकर काव्यगोष्ठियों में श्रोता मंडली को सुनाकर वाहवाही बटोरने में बेशक बेमिसाल और लासानी हैं।

पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर की वर्कशॉप से 31 अगस्त 2007 को सीनियर सेक्शन इंजीनियर (यांत्रिक) के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद तो साहित्य सेवा से पूर्णकालिक तौर पर जुड़ गए और काव्य लेखन की हर विधा में लेखनी चलाई। हिंदी, उर्दू में तो व्यापक लेखन किया ही है, अंग्रेजी में भी कई बाल कविताएं लिखकर 75 साल की पकी उम्र में पांच साल के बाल मन की भी अक्सर अनुभूति कराते चलते हैं।

रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ की प्रकाशित काव्य कृतियों में 1-कल्याण काव्य कौमुदी (हिंदी ग़ज़ल), 2-बज्मे इश्क़ (ग़ज़ल संग्रह), 3-अनुभूति से अभिव्यक्ति (गीत संग्रह), 4-इश्क़ का दर्द (ग़ज़ल संग्रह), 5-जब आती है याद तुम्हारी (गीत संग्रह), 6-मीत मन से मन मिला तू (हिंदी ग़ज़ल संग्रह)।

संपादन-इनके अलावा दर्द के आंसू (ग़ज़ल संग्रह), आकांक्षा (गीत संग्रह), नजरान-ए-अक़ीदत (नात-ए-पाक संग्रह), वसील ए निजात (नात-ए-पाक संग्रह), स्मृति शेष (गीत संग्रह), गंगाजलि स्मारिका, ननति अंजलि स्मारिका, श्रमांजलि स्मारिका का कुशल संपादन भी किया है। कई काव्य ग्रंथों के साथ ही प्रियदर्शी अभिनंदन ग्रंथ के सहयोगी संपादक रहे हैं। दूरदर्शन बरेली और आकाशवाणी के रामपुर, बरेली केंद्रों से उनके एकल काव्यपाठ/कवि गोष्ठियों में सहभागिता का प्रसारण पिछले लगभग पांच दशकों से नियमित रूप से होता रहा है। राष्ट्रीय और प्रांतीय काव्य मंचों पर अनेक बार प्रतिनिधित्व कर बरेली की साहित्यिक मेधा और क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं।
रणधीर गौड़ ‘धीर’ पिछले लगभग साढ़े तीन दशक से काव्य गोष्ठी आयोजन समिति के बैनर तले लगभग 340 मासिक कवि गोष्ठियों का निरंतर, नियमित रूप से आयोजन करते रहे हैं। हजारों काव्य गोष्ठियों का कुशल संचालन कर चुके हैं और अखिल भारतीय, प्रांतीय और स्थानीय काव्य मंचों पर अनगिनत बार सम्मानित-अभिन॔दित हो चुके हैं।

इज्जतनगर रेलवे वर्कशाॅप में सीनियर सेक्शन इंजीनियर (यांत्रिक) की बड़ी जिम्मेदारी बखूबी संभालते हुए तमाम व्यस्तताओं के बावजूद रणधीर गौड़ अपने पूरे सेवाकाल में अपने साहित्यिक सरोकारों से जुड़े रहकर और सामाजिक दायित्वों का भी पूरी गंभीरता से निर्वहन करते रहे।

कवि-साहित्यकार के अलावा गौड़ साहब की पहचान जुझारू श्रमिक नेता की भी रही है। वर्ष 1983 से 1996 तक ऑल इंडिया टेक्नीकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन के सचिव और 1996 से सेवानिवृत्ति तक अध्यक्ष पद पर रहे। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ में सचिव पद पर पांच वर्ष सफलतापूर्वक कार्य किया।
रणधीर गौड़ ने खेलकूद और नागरिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी है। विद्यार्थी जीवन में कालेज की क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे। बाद में रेल सेवा के दौरान भी लगभग दो दशक तक जिला, मंडलस्तरीय प्रतियोगिताओं में क्रिकेट टीम की कप्तानी की। क्रिकेट के अलावा भी कई इन्डोर-आउटडोर खेलों में वर्षों दम-खम दिखाया और ढेर सारे अवार्ड्स, ट्राफियां अपने नाम किया। लगभग 10 साल जिला क्रीड़ा समिति के सचिव भी रहे।

रणधीर गौड़ वर्ष 1964 से 1976 तक साहूकारा बरेली पोस्ट पर सेक्टर वार्डन और डिप्टी पोस्ट वार्डन की हैसियत से सक्रिय कार्य किया। 1965 और 1971 के युद्ध में नागरिक सुरक्षा का दायित्व कुशलतापूर्वक निभाने पर बरेली के तत्कालीन जिलाधिकारियों द्वारा प्रशस्तिपत्र प्रदान कर अभिनंदन भी किया गया था।

रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ की खूबी और खासियत यह है कि 75 की ढलती उम्र में भी वह शारीरिक-मानसिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रहते हैं। युवा-नवोदित कवियों को भी कभी अपनी वरिष्ठता का दर्प नहीं दिखाते हैं और उन्हें भरपूर प्रोत्साहन देते रहे हैं। सच कहें तो गौड़ साहब ने कविता के महंतों-ठेकेदारों के खांचे में बंधने से बहुत ही नफासत और खूबसूरती से खुद को बचाए रखा है। असल में गौड़ साहब बरेली में कविता और साहित्य के ऐसे छतनार वटवृक्ष हैं जिसकी शाखों और जड़ों ने न जाने कितने अनगढ़-बेढब कवियों को अपने सौजन्य-सौहार्द्र के खाद-पानी से सींचकर बड़े कवि का दर्जा दिलाया है। नवोदित कवियों को उचित मंच और उनकी काव्य कला में संशोधन, परिमार्जन के नियमित अवसर देते रहते हैं।

कवि-गीतकार स्वर्गीय ज्ञानस्वरूप ‘कुमुद’

वस्तुतः रणधीर गौड़ ‘धीर’ बरेली के अपने समकालीन उन चंद बड़े कवि-साहित्यकारों में शामिल हैं जिन्होंने कभी नए-उभरते कवियों को अपनी वरिष्ठता-गुरुता का घमंड नहीं दिखाया। बल्कि अपने ही बच्चे की तरह उनकी उंगली थामकर कविता सिंधु की गहराइयों में उतरने का हुनर सिखाते रहे। इन स्वनाम धन्य कवियों-शायरों में स्वर्गीय ज्ञानस्वरूप ‘कुमुद’, स्व. रामप्रकाश गोयल, स्व. प्रदीप सेवक और विनय साग़र जायसवाल, डाॅ. महेश ‘मधुकर’, डाॅ. शिवशंकर ‘यजुर्वेदी’, डाॅ. इंद्रदेव त्रिवेदी, राममूर्ति गौतम ‘गगन’ आदि शामिल हैं। मेरा परिचय इन सबसे लगभग 25 वर्ष पहले 1997 में हुआ था। सब मुझे भरपूर प्यार, मान-सम्मान और कविता लेखन की त्रुटियों को सुधारने के लिए नियमित मार्गदर्शन भी देते थे। विशेष रूप से स्व. कुमुद जी और रणधीर गौड़ धीर से मिला अपनत्व, स्नेह, मान-सम्मान और मार्गदर्शन और इन दोनों का जादुई व्यक्तित्व तो ढाई दशक का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी अब तक भुलाए नहीं भूलता है।

असल में बरेली में काव्य कला की नर्सरी हैं रणधीर गौड़ ‘धीर’। 75वें जन्म दिन पर मां शारदे के इस वरद पुत्र के उत्तम स्वास्थ्य, सानंद, प्रसन्नचित्त सामाजिक-पारिवारिक जीवन जीने और शतायु होने की प्रार्थना, याचना और ढेर सारी मंगलकामनाएं करते हैं। असल में बरेली में काव्य कला की नर्सरी हैं रणधीर गौड़ ‘धीर’। 75वें जन्म दिन पर मां शारदे के इस वरद पुत्र के उत्तम स्वास्थ्य, सानंद, प्रसन्नचित्त सामाजिक-पारिवारिक जीवन जीने और शतायु होने की प्रार्थना, याचना और ढेर सारी मंगलकामनाएं करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!