सत्य पथिक वेबपोर्टल/मुम्बई/Maharashtra Assembly Floor Test: एकनाथ शिंदे को बहुमत साबित करने के लिए विधायकों के 144 मत चाहिए थे। पहले फ्लोर टेस्ट ध्वनि मत के जरिए होना था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते नहीं हो पाया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने हेड काउंट के जरिए मतदान कराया। इसमें विधानसभा के एक-एक सदस्य से पूछा गया कि वह किसके साथ हैं? इस वोटिंग में एकनाथ शिंदे के पक्ष में 164 विधायकों ने वोट डाला। विपक्ष में केवल 99 वोट ही पड़े। एनसीपी और कांग्रेस के कुछ विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए।

बहुजन विकास आघाड़ी के तीन विधायकों ने शिंदे को दिए वोट 
फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले बड़ा गेम हुआ। शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस गठबंधन महाविकास अघाड़ी में शामिल बहुजन विकास अघाड़ी ने आखिरी वक्त बगावत कर दी। बहुजन विकास अघाड़ी के तीन विधायकों ने शिंदे के पक्ष में वोट डाला। इसके अलावा कांग्रेस विधायक अशोक च्वहाड़, विजय वडेट्टीवार, प्रणीती शिंदे, जिशन सिद्दीकी, धीरज विलासराव देशमुख, एनसीपी के अन्ना बंसोडे और संग्राम जगताप वोटिंग में नहीं पहुंचे। समाजवादी पार्टी के दो और एआईएमआईएम के एक विधायक ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।

ऐन मौके पर पलटे शिवसेना के कई विधायक
ऐसा नहीं है कि केवल एनसीपी, कांग्रेस में ही वोटिंग के दौरान खेल हुआ। शिवसेना के विधायक भी आखिरी समय पलट गए। उद्धव ठाकरे गुट के संतोष बांगड और श्याम सुंदर शिंदे ने एकनाथ शिंदे के पक्ष में वोट डाला। वहीं, शिंदे के साथ गोवा जाने वाले राहुल पाटिल और कैलाश पाटिल आखिरी समय में वापस उद्धव ठाकरे गुट में शामिल हो गए। दोनों ने शिंदे के खिलाफ वोट डाला।

एनसीपी और कांग्रेस में भी फूट के आसार ?
महाराष्ट्र की राजनीति के जानकार वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप रायमुलकर कहते हैं- पहले विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव और फिर फ्लोर टेस्ट में एनसीपी-कांग्रेस के कुछ विधायक गैर हाजिर रहे। वह भी तब जब पार्टी ने व्हिप जारी कर रखा था। जाहिर है कि बगावत के सुर एनसीपी और कांग्रेस में तेज होने लगे हैं।’ रायमुलकर बताते हैं, ‘कांग्रेस विधायकों की नाराजगी सभी को मालूम है। लंबे समय से कांग्रेस विधायक गठबंधन पर सवाल खड़े करते रहे हैं। ऐसे में मुमकिन है कि अगले कुछ दिनों में नाराज विधायक भाजपा या शिवसेना का साथ पकड़ लें।’

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