लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में तीसरे दिन भी दी गईं सामूहिक आहुतियां, महंत गोपालानंद महाराज ने की भागवत्कथा की अमृतमयी रसवर्षा

सत्य पथिक वेबपोर्टल/बरेली/Shri Laxmi Narayan Mahayagya & Bhagwat Katha: मनोहर भूषण इंटर कॉलेज प्रांगण में चल रहे श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को 108 तुलसी पत्र से विशेष पूजन एवं हवन किया गया। मंत्रों का सामूहिक उच्चारण करते हुए यज्ञ में आहुतियां दी गईं।

महंत श्री गोपालानंद ब्रह्मचारी जी महाराज द्वारा शाम 4:00 बजे से भागवत कथा का सुंदर संगीतमय गुणगान किया गया। कथा वाचक गोपालानंद महाराज ने राजा परीक्षित की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि कर्म का फल तो देर-सवेर मिलता ही है। जैसा राजा को ऋषि के अपमान का फल सर्प दंश के रूप में मिला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सनातनी को तिलक लगाना ही चाहिए क्यूंकि मस्तक पर ब्रह्मा का वास होता है। ब्रह्मा जी ने मन से सृष्टि बनाई, उनकी भृकुटि से मानस पुत्र मनु उत्पन्न हुए। हम उन्हीं के वंशज हैँ। इसी तरह यहां हो रहा यज्ञ भगवान का ही रूप है। यज्ञ भगवान की प्रदक्षिणा करने से भी मन माँगा फल मिल सकता है।

कथाव्यास ने समझाया कि बल तीन प्रकार के होते हैं-आत्मबल, तप बल और बाहुबल। इनमें भी तपबल सदा ही प्रभावी रहता है। जंगल में न जा पाओ तो मन को ही वृन्दावन बना लो। जितनी भी आसक्तियां हैँ, उनको कम करो। अपना सब अपनों को सौंप दो और स्वयं को प्रभु भक्ति में लगाओ। बरेली की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि यह शहर बहुत पवित्र है। यहां राम गंगा हैं। आप सब बहुत भाग्यशाली हो जो उनके दर्शन पाते हो।

कथा में आयोजन समिति के सदस्य व्यवस्थापक पंडित पंकज पाठक, जनसंपर्क प्रभारी ठाकुर राहुल सिंह, महंत राजेश शर्मा, आचार्य हेमंत शांडिल्य, आचार्य अनुज मिश्रा, सचिव विनोद मिश्रा, किशन मौर्या, मुकेश सागर, ओमपाल गंगवार, राधा सिसोदिया, सृष्टि शर्मा, शिवानी कश्यप आदि कार्यकर्ता व्यवस्था बनाने में लगे रहे।

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