सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली-पटना/Bihar Politics: नीतीश कुमार बीजेपी को छोड़कर फिर से आरजेडी के साथ आ गए हैं। चर्चा है कि नीतीश कुमार ने महागठबंधन के साथ एक डील तय की है, जिसके तहत नीतीश कुमार केवल 8-10 महीने के लिए ही बिहार के सीएम रहेंगे लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वह विपक्ष के पीएम पद के उम्मीदवार होंगे।

हालांकि तमाम सियासी जानकारों की नजर में नीतीश का यह फैसला भाजपा के लिए भी अच्छा ही है। यूपी की तरह बिहार में भी अब वह करप्शन और गुंडा-माफियाराज पर जीरो टॉलरेंस पालिसी के साथ स्वतंत्र रूप से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदाताओं के बीच जा सकेगी।

वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी का कहना है कि आरजेडी में उन्हें वो सम्मान नहीं मिलेगा, जो बीजेपी ने उन्हें दिया है। वहीं बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने नीतीश के इस फैसले पर कहा कि उन्होंने जनादेश के साथ विश्वासघात किया है। जनता ही उन्हें सबक सिखाएगी।बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए अभी 2 साल बाकी हैं। इससे पहले 2024 का लोकसभा चुनाव है। दरअसल, इन दो बड़े मुकाबलों के लिए नीतीश अपनी सियासी जमीन को मजबूत करना चाहते हैं। नीतीश कुमार 2024 में विपक्ष का पीएम का चेहरा बन सकते हैं। नीतीश की छबि बेदाग हैं और उन पर परिवारवाद का आरोप भी नहीं है।

मुश्किलें बढ़ेंगी लेकिन फायदा भी होगा
बीजेपी ने फिलहाल अपना एक बड़ा सहयोगी खो दिया है। लोकसभा चुनाव से पहले जेडीयू से गठबंधन टूटना बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। जेडीयू के साथ गठबंधन करके बीजेपी बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनने की रणनीति पर काम कर रही थी।इस अब बीजेपी को इस लॉन्ग टर्म प्लान को पूरा करने में कठिनाइयां आ सकती हैं लेकिन बीजेपी आरजेडी और उसकी समर्थक कई विपक्षी पार्टियों पर भी अपनी भ्रष्टाचार विरोधी नीति को एक्टिव कर सकती है।

महागठबंधन सरकार का शपथ समारोह आज
बिहार में आज बुधवार दोपहर महागठबंधन सरकार का शपथ ग्रहण समारोह है। कैबिनेट में आरजेडी के सबसे ज्यादा 16 विधायक मंत्री बनेंगे। जेडीयू के 13, कांग्रेस के 4, हम के 1 के विधायक को भी नई सरकार में मंत्री पद मिल सकता है। लेफ्ट पार्टियां इस सरकार को बाहर से समर्थन देंगी। नीतीश कुमार ने दावा किया है कि कुल सात पार्टियों और एक निर्दलीय विधायक समेत उनके पास कुल 165 विधायकों का समर्थन है।

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