सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/New relations between ShivSena & BJP: सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कैंप को दोबारा फौरी राहत मिलने के बाद उद्धव ठाकरे और भाजपा के बीच दूरियां घटने और नजदीकियां बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

मुर्मू को समर्थन : शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को सांसदों की बैठक बुलाई थी। इसमें राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा हुई। शिवसेना के 19 सांसद हैं। ज्यादातर सांसदों ने द्रौपदी मुर्मू को ही समर्थन देने की राय जाहिर की। इस पर शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने भी सकरात्मक संकेत दिए हैं।

संजय राउत का ट्वीट : सांसदों के साथ बैठक के बाद आज सुबह संजय राउत ने एक ट्वीट किया। ये ट्वीट उन्होंने उद्धव ठाकरे, प्रियंका गांधी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को टैग किया है। इसमें लिखा कि ‘अब नहीं कोई बात खतरे की… अब सभी को सभी से खतरा है।’ सियासी गलियारे में ये ट्वीट चर्चा का विषय है। माना जा रहा है कि सोमवार को सांसदों की बैठक में संजय राउत इकलौते सदस्य थे जो विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को पार्टी की सपोर्ट चाहते थे लेकिन उद्धव नहीं माने।

महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप रायमुलकर कहते हैं, ‘बैठक में संजय राउत ने काफी कोशिश की, लेकिन उद्धव ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने पर ही सहमति दी। ऐसे में अब संजय को ये लगने लगा है कि उद्धव भाजपा के प्रति नरम होने लगे हैं। यह बात उन्हें पच नहीं रही है।

आदित्य ठाकरे को छोड़कर सभी को नोटिस : उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने कुछ दिनों पहले एक-दूसरे गुट के विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इस मामले की सुनवाई फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस बीच, सोमवार को राज्य विधायिका के प्रमुख सचिव राजेंद्र भागवत ने शिवसेना के 53 विधायकों को दलबदल के आधार पर अयोग्यता नियम के तहत नोटिस जारी किया। विधायकों को सात दिन में जवाब देने को कहा गया है। लेकिन हैरानी की बात है कि आदित्य ठाकरे को यह नोटिस जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा और एकनाथ शिंदे ने ही आदित्य ठाकरे को नोटिस नहीं भेजने का फैसला लिया है। 

ठाकरे परिवार के खिलाफ नहीं बोलेंगे भाजपा नेता : भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट ने तय किया है कि वह ठाकरे परिवार के खिलाफ कोई कुछ नहीं बोलेगा। इसका खुलासा शिंदे खेमे के विधायक दीपक केसरकर ने किया है। उन्होंने कहा, ‘हमने बीजेपी के साथ जाने के साथ ही तय किया था कि हमारे पार्टी प्रमुख और उनके परिवार के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला जाएगा। ताज होटल में शिवसेना और बीजेपी विधायकों के बीच हुई बैठक में यह फैसला किया गया। किरीट सोमैया ने हमारे पार्टी प्रमुख के खिलाफ टिप्पणी की थी। मैंने फडणवीस से बात की। उन्होंने भी किरीट सोमैया की टिप्पणी को अनुचित और अस्वीकार्य बताते हुए साफ कह दिया था कि ठाकरे परिवार के खिलाफ कुछ भी नकारात्मक नहीं कहा जाएगा।’ केसरकर के इस बयान से भी साफ है कि आने वाले दिनों में उद्धव और भाजपा के बीच रिश्तों पर जमी बर्फ पिघल सकती है।

शिंदे खेमा लगातार हो रहा मजबूत
मुख्यमंत्री शिंदे के पास अभी 41 शिवसेना विधायकों समेत विपक्ष के 50 से भी ज्यादा एमएलए का समर्थन है। इनमें एक उद्धव गुट के विधायक भी शामिल हैं। इसके अलावा 9-12 सांसद भी शिंदे के पक्ष में बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही
ठाणे नगर निगम के 67 शिवसैनिक पार्षदों में से 66 ने शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। इसी तरह कल्याण-डोंबिवली के 55 से ज्यादा शिवसैनिक पार्षदों ने शिंदे गुट को समर्थन दिया है। कल्याण डोंबिवली महानगर पालिका के अध्यक्ष राजेश मोरे भी शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं। नवी मुंबई के 32 पूर्व कॉरपोरेटर भी अब शिंदे के साथ आ चुके हैं।

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