सत्य पथिक वेबपोर्टल/नोएडा/Traffic Problem: नोएडा सेक्टर 58 मुर्गा मंडी रेड लाइट चौराहे पर पिछले काफी समय से फॉलो हो रहे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस बेहद व्यस्त चौराहे पर आए दिन red lights खराब हो जाती हैं। लेकिन जब red lights चालू होती हैं तब भी फर्राटे भर रहे वाहन चालक यहां red light ऑन होने पर भी रुकना गवारा नहीं करते और फर्राटे भरते निकल जाते हैं।

इन तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं कि कैसे red lights On होते हुए भी ऑटो, बाइक, रिक्शा वाले किस तरह ट्रैफिक नियमों को ताख पर रखकर आगे निकल जा रहे हैं। माना जाता है कि बड़े शहरों में चौराहों पर रेड लाइट सिस्टम को इसलिए लागू किया जाता है ताकि जगह-जगह जाम नहीं लगे और लोग सही-सलामत अपने-अपने घरों या कार्यस्थल की तरफ आ-जा सकें। साथ ही ऑफिस वाले, अन्य काम करने वाले और पैदल चलने वाले लोग भी सही सलामत सड़कों पर चल सकें।

नोएडा सेक्टर 58 मुर्गा मंडी रेड लाइट चौराहे पर बार-बार ट्रैफिक रूल्स तोड़े जाते हैं लेकिन कोई जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ ध्यान ही नहीं देता है। दरअसल, अफसर हों या आम जनता, ज्यादा से ज्यादा सुख-सुविधाएं और अधिकार तो सबको चाहिए लेकिन जिम्मेदारी लेना कोई नहीं चाहता।

शहरों में चौराहों पर red lights होती हैं ताकि छोटे-बड़े वाहन और पैदल राहगीर बगैर किसी दुर्घटना का शिकार हुए अपने गंतव्यों पर पहुंच सकें लेकिन दिक्कत यह है कि जल्दी पहुंचने के चक्कर में कोई भी रेड लाइट ऑन होने पर चौराहे पर थोड़ी देर रुककर इंतजार करने की जरूरत महसूस नहीं करता है। ट्रैफिक डिपार्टमेंट के अधिकारी भी रेड लाइट्स पर ट्रैफिक रूल्स सख्ती से लागू करवाने के लिए थोड़ी सी भी गंभीरता नहीं दिखाते हैं। उल्टे चौराहों पर ट्रैफिक लाइट सिग्नल खराब होने पर कई-कई दिन तक उन्हें दुरुस्त भी नहीं कराते हैं।

नोएडा सेक्टर 58 मुर्गा मंडी चौराहे पर ट्रैफिक रूल्स तोड़ने और तुड़वाने का यह सिलसिला सालों से बदस्तूर चला आ रहा है। यहां वर्षों तक तो ट्रैफिक सिग्नल लगाए ही नहीं गए। अब दो माह पहले ट्रैफिक लाइट सिग्नल लगाए भी गए तो कई-कई दिन तक बंद ही रहते हैं। इससे भी बड़ी समस्या यह है कि जब red lights चालू होती हैं तो भी ज्यादातर वाहन चालक चौराहे पर रुकने के बजाय फर्राटे भरते आते-जाते रहते हैं और अक्सर बेतरतीब वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही से काफी-काफी देर तक ट्रैफिक जाम रहता है। लोगों की इस लापरवाही की वजह से दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।

सवाल है कि क्या मुर्गा मंडी चौराहे पर लाखों रुपये खर्च कर लगवाए गए ट्रैफिक लाइट सिग्नल्स और यातायात विभाग के तमाम नियम-क़ायदे सिर्फ दिखावा या छलावा हैं। या अफसर कभी सिग्नल्स चालू रखने और नियमों को सख्ती से फॉलो करवाने की गंभीरता भी दिखाएंगे?

एक नेशनल टीवी चैनल की सीनियर प्रोड्यूसर शिवांजलि गंगवार की रिपोर्ट

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