नई दिल्ली/technology/सत्य पथिक न्यूज नेटवर्क: मोदी सरकार देश में सेटेलाइट संचार सेवा के प्रसार के लिए सरकारी व निजी कंपनियों को लाइसेंस देने की तैयारी में जुटी है। रेलवे, स्टेट ट्रांसपोर्ट जैसी कुछ दूसरी सरकारी एजेंसियां भी अपने कैप्टिव सेटेलाइट आधारित संचार केंद्र स्थापित कर पाएंगी। इस क्षेत्र में निवेश में भी बढ़ोतरी होगी, क्योंकि कई स्टार्ट-अप्स अपने छोटे-छोटे सेटेलाइट्स के जरिये कंपनियों को संचार सेवा मुहैया करा सकेंगे। अमेरिका, यूरोप के कई देशों में यह मॉडल काफी कारगर साबित हो रहा है।

ट्राई ने लाइसेंस देने को जारी किया मसौदा

दूरसंचार विभाग के आग्रह पर सेटेलाइट संचार सेवा को देश भर में लाइसेंस देने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने मसौदा जारी किया है। ट्राई के मुताबिक सेटेलाइट संचार सेवा के प्रसार का फायदा यह होगा कि दूरस्थ इलाकों में भी मोबाइल- इंटरनेट सेवा मिल सकेगी।

सेटेलाइट संचार का तमाम क्षेत्रों में मिलेगा फायदा

ट्राई के मुताबिक, सेटेलाइट संचार सेवा के व्यवसायीकरण से सप्लाई चेन प्रबंधन, स्मार्ट ग्रिड्स, रेलवे, आपदा प्रबंधन, आंतरिक सुरक्षा, मत्स्य पालन, स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों को मुख्य रूप से लाभ मिलेगा। राज्य परिवहन प्राधिकरण, रेलवे और अधिक संख्या में वाहन रखने वाली अन्य कंपनियां कैप्टिव नेटवर्क स्थापित करने के लिए अलग से लाइसेंस ले सकेंगी। सेटेलाइट संचार सेवा के जरिये रेलवे ट्रेनों की आवाजाही, सुरक्षा आदि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में सक्षम हो सकेगा।

ट्राई का कहना है कि ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्यूनिकेशन बाई सेटेलाइट (जीएमपीसीएस) सेवा के जरिये लाइसेंसधारक अपने इलाके में सभी प्रकार की इंटरनेट व वॉयस सेवा यानी कॉलिंग की सुविधा भी मुहैया करा सकेंगे। जीएमपीसीएस के लिए लाइसेंसधारक को भारत में अपना स्टेशन स्थापित करना होगा।

कम लागत में सेटेलाइट संचार सेवा देने में सक्षम कई स्टार्ट अप

ट्राई का दावा है कि इन दिनों कई स्टार्ट-अप कंपनियां मात्र 1.3 किलोग्राम के उपग्रह के जरिये सेटेलाइट संचार सेवा मुहैया कराने में सक्षम हैं। इनकी लागत भी 10 लाख डॉलर यानी सात करोड़ रुपये से कुछ ही ज्यादा है। ट्राई का मानना है कि आने वाले समय में इस ट्रेंड में और बढ़ोतरी होगी। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा जैसे देशों में सेटेलाइट आधारित संचार सेवा काफी सफल साबित हो रही है और इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है।

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