दिव्यांगता से हार मानने के बजाय लिख डाली कामयाबी की प्रेरणादायक पटकथा

औंध पूर्व माध्यमिक विद्यालय का अपने बलबूते कर दिखाया कायाकल्प

खूबसूरत बगिया, प्रोजेक्टर से लैस कंप्यूटर लैब, हैंडवाश स्टेशन हैं आकर्षण के विशेष केंद्र

गणेश ‘पथिक’ वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि-

सत्य पथिक वेबपोर्टल/बरेली/Ideal Teacher-Rahul Yaduvanshi: -‘पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है’-इस तथ्य को साबित करके दिखा रहे हैं बचपन से ही एक पैर पोलियो की वजह से निष्क्रिय हो चुकने के बावजूद एक आदर्श शिक्षक की पहचान बना चुके मीरगंज के गांव नथपुरा के मूल निवासी परिषदीय शिक्षक राहुल यदुवंशी। बच्चों को हौसलों की ऊंची उड़ान देने के लिए उन्होंने निजी ख़र्च से फतेहगंज पश्चिमी ब्लाॅक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय औंध में बाकायदा कंप्यूटर लैब बना रखी है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेम भी इस कदर है कि विद्यालय कैंपस को तरह-तरह के फूलों और फलदार, छायादार, शोभादार बगिया की शक्ल दे डाली है। समय-समय पर निरीक्षण को आने वाले बीएसए समेत तमाम विभागीय अधिकारी भी राहुल के प्रकृति प्रेम और बच्चों को पढ़ाई, सामान्य ज्ञान के साथ ही खेलकूद में सर्वश्रेष्ठ बनाने की जिद, जुनून और जज्बे की तारीफ किए बगैर रह नहीं पाते हैं।

रोजाना पांच किमी पैदल चलकर पढ़ने आते थे

जनपद बरेली की मीरगंज तहसील के गांव नथपुरा में साधारण किसान परिवार में माता श्रीमती नारायणी देवी एवं शिक्षक पिता श्री गोविंदराम यदुवंशी के घर में 5 जनवरी 1977 को राहुल यदुवंशी का जन्म हुआ था। जन्म के लगभग डेढ़ वर्ष बाद ही एक पैर पोलियो वायरस के संक्रमण का शिकार हो गया। इसके साथ ही दुश्वारियों का दौर भी शुरू हो गया। प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय नथपुरा से पूरी करने के बाद जूनियर हाई स्कूल की शिक्षा स्वामी दयानंद सरस्वती विद्या मंदिर मीरगंज से प्राप्त की। प्रतिदिन लगभग 5 किलोमीटर की यात्रा पैदल ही करनी होती थी।

दो-दो बस्ते लादकर चलती थीं बड़ी बहन

दिव्यांगता के चलते भारी बस्ते का बोझ नहीं उठा पाता था तो मेरा बस्ता भी बड़ी बहन कंधे पर लादकर चलती थी। कक्षा आठ पास करने के बाद ही साइकिल चलाना सीखा और आगे की शिक्षा के लिए स्वयं को तैयार किया। मीरगंज के राजेंद्र प्रसाद इंटर कॉलेज से वर्ष 1991 में हाई स्कूल परीक्षा विज्ञान वर्ग प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इंटरमीडिएट की परीक्षा भी इसी विद्यालय से विज्ञान वर्ग से द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की। इस दौरान पढ़ाई के साथ-साथ काॅलेज के शिक्षकों से साबुन, डिटर्जेंट पाउडर, लिफाफे और मोमबत्ती बनाने सहित कई व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किए। विज्ञान स्नातक, परास्नातक गणित की परीक्षा महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय बरेली से संबद्ध केजीके कॉलेज मुरादाबाद से पूर्ण की।

व्यक्तित्व निखारने में गुरुजनों के योगदान को बताते हैं अमूल्य निधि

राहुल बताते हैं कि प्रारंभिक शिक्षा के दौरान सर्वश्री हरचरण लाल, मोहन लाल एवं उमेश चंद्र शर्मा जैसे योग्य शिक्षकों का मार्गदर्शन मिला वहीं हाईस्कूल-इंटर में विद्या विनोद दीक्षित, उमेश चंद्र पाठक, बृजराज सिंह राघव और ठाकुर रामपाल सिंह जैसे योग्य शिक्षकों का उनके व्यक्तित्व को ढालने में निस्संदेह महान योगदान रहा है। स्नातक-परास्नातक की पढ़ाई के दौरान गणित के गूढ़ सवालों को आसानी से हल कराने और इस नीरस विषय को भी सरल-रुचिकर बनाने में केजीके कॉलेज मुरादाबाद के तत्कालीन गणित विभागाध्यक्ष आदरणीय गुरुवर डॉ. पीके शुक्ला के अहम योगदान को तो राहुल अपने पूरे जीवन की अमूल्य निधि मानते हैं। बकौल राहुल, वर्ष 2002 में डायट फरीदपुर में बीटीसी में प्रवेश लिया। वहां मुझे बच्चों के प्रिय आदर्श शिक्षक के रूप में सजाने-संवारने और ढालने का दायित्व डायट प्रवक्ता श्रीमती रीना श्रीवास्तव, श्री एसडी शर्मा, श्री डाॅ. इंद्रदेव त्रिवेदी सरीखे कुशल एवं अनुभवी शिक्षक शिल्पियों ने बखूबी निभाया।

पहली नियुक्ति वाले गांव में खुलवाया पूर्व माध्यमिक विद्यालय

सहायक अध्यापक के रूप में राहुल को पहली नियुक्ति तीन फरवरी 2003 को विकास क्षेत्र मीरगंज के प्राथमिक विद्यालय अब्दुल्लागंज में मिली थी। शिक्षक जीवन में छात्र-छात्राओं को गुणवत्तायुक्त बेहतर शिक्षा देने के साथ ही राहुल विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में सदैव संलग्न रहे हैं। शिक्षक जीवन की इस विकास यात्रा में अपनी पहली नियुक्ति वाले प्राथमिक विद्यालय अब्दुल्लागंज में अध्यापन के साथ-साथ अन्य पाठ्य सहगामी क्रियाओं का भी संचालन किया गया। बच्चों को मुफ्त अच्छी शिक्षा मिलने पर ग्राम वासियों की मांग पर गांव में विभाग द्वारा परिषदीय जूनियर हाईस्कूल भी स्थापित भी कराया गया। वर्ष 2006 में प्राथमिक विद्यालय फतेहगंज पश्चिमी प्रथम में तबादला हुआ। वहां भी राहुल के व्यक्तिगत प्रयासों से छात्र संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। पौधरोपण जैसे सामाजिक कार्य भी कराए गए। वर्ष 2009 में मीरगंज विकास क्षेत्र के संजरपुर प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर प्रमोशन मिला तो उस जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाया। 2010 में फतेहगंज पश्चिमी ब्लाॅक के उच्च प्राथमिक विद्यालय खिरका में विज्ञान अध्यापक के पद पर तैनाती हुई।

विज्ञान क्लब के कार्यक्रमों में शिरकत की, मंच संचालन सीखा

राहुल ने विज्ञान अध्यापक के रूप में जिला विज्ञान क्लब के विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी और विद्यालय के छात्र-छात्राओं की प्रतिभागिता कराई और कई बार सम्मानित भी हुए। इसी दौरान मंच संचालन का कौशल भी सीखा। इस क्रम में प्रदेश के तत्कालीन विधि एवम् कानून मंत्री बृजेश पाठक के मुख्य आतिथ्य में आयोजित भावी पीढ़ी को समर्पित “बस थोड़ा सा” महोत्सव मील का पत्थर साबित हुआ। इसमें लगभग ढाई हजार प्रतिभागियों ने सहभागिता की थी।

दो साल से 110 बच्चों को अकेले संभाल रहे

राहुल यदुवंशी विकास क्षेत्र फतेहगंज पश्चिमी के पूर्व माध्यमिक विद्यालय औंध में वर्ष 2013 से कार्यरत हैं। विद्यालय में निजी प्रयासों से कंप्यूटर लैब बनवाकर प्रोजेक्टर भी लगवाया है। रोटरी क्लब के माध्यम से हैंडवाश स्टेशन बनवाया है, विद्यालय की बाउंड्रीवाल को ऊंचा कराया है, साथ ही विद्यालय परिसर में खूबसूरत वाटिका भी विकसित कराई है। खास बात यह कि यह सब राहुल यदुवंशी पिछले दो साल से विद्यालय में अकेले दम पर करने के साथ ही 110 छात्र-छात्राओं को संभाल भी रहे हैं। बीएसए और जिला प्रशासन के आला अफसरों ने ग्रामवासियों की बार-बार की गुहार को भी अनसुना करते हुए इस विद्यालय में किसी अन्य शिक्षक-शिक्षिका की तैनाती नहीं कराई है।

इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में भी लिया हिस्सा

वर्ष 2018 में लखनऊ में इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में बेसिक शिक्षा विभाग बरेली की तरफ से प्रतिभाग करने का अवसर मिला। इसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। उक्त साइंस फेस्टिवल में जहां एक ओर देश-विदेश के वैज्ञानिकों द्वारा शोध पत्र पढ़े गए, वहीं बॉटनिकल गार्डन में विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों से रूबरू होने का भी अवसर मिला। साइंस फेस्टिवल में राज्यसभा (अब संसद) टीवी चैनल के लाइव शो में सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखने का अवसर भी प्राप्त हो चुका है।’प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ विषय पर आकाशवाणी बरेली से राहुल यदुवंशी की वार्ता भी प्रसारित हो चुकी है।

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