केंद्र सरकार से सख्त कानून बनाने को कहा, कपिल सिब्बल से भी मांगी राय, पीएम मोदी भी बड़े खतरे से कर चुके हैं खबरदार

सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/SC on Free Facilities Culture: चुनाव में जीत के लिए मुफ्त रेवड़ियां बांटने के कल्चर पर देश भर में छिड़ी बहस और सत्ता पक्ष-विपक्ष के आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया है।

भाजपा नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता, राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल से राय मांगी। साथ ही केंद्र सरकार से कहा कि चुनाव जीतने के लिए मुफ्त रेवड़ियां बांटने की राजनीति देश की आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं है। आप इसे खत्म करने के लिए जल्दी ही कोई नीति बनाइये। सिब्बल के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार वित्त आयोग से बात करे। साथ ही सख्त कानून लेकर आए। सरकार की तरफ से पेश हुए एडीशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने तर्क दिया कि यह मामला चुनाव आयोग के क्षेत्र में आता है।

इससे पहले 19 जुलाई को केंद्र सरकार द्वारा पड़ोसी श्रीलंका के आर्थिक संकट पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था, ‘श्रीलंका के गंभीर संकट से भारत चिंतित है और इसे बड़े सबक के तौर पर भी देख रहा है। हमें भी आर्थिक समझदारी दिखाते हुए और मुफ्त सामान बांटने वाली संस्कृति पर रोक लगानी होगी।’ उनका यह बयान सभी दलों के लिए सख्त संदेश के तौर पर देखा गया क्योंकि मुफ्त की रेवड़ी वाले कल्चर ने देश के राज्यों की कमर तोड़ी हुई है।

देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन भी मानते हैं कि विधानसभा चुनावों में मुफ्त सामान बांटने का जो Trend भारत में चल रहा है वो भविष्य के लिए खतरनाक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल ही में भारत में फैले रेवड़ी कल्चर पर सवाल उठा चुके हैं।ज्यादातर राज्यों पर करोड़ों का कर्ज है। विधानसभा चुनावों में मुफ्त सामान और सुविधाएं बांटने के वायदे पूरे करने के लिए अपना खजाना खाली होने पर केंद्र से हजारों करोड़ रुपये कर्ज के तौर पर लेने पड़ रहे हैं। अधिकांश मुफ्त की बिजली बांटने के चक्कर में केंद्रीय बिजली क॔पनियों के अरबों रुपये के कर्ज में डूबे हुए हैं तो बिजली क॔पनियों पर कोयला उत्पादक कोल इंडिया और निजी कोयला उत्पादन क॔पनियों, रेलवे की हजारों करोड़ की देनदारी है।

सबसे बड़े कर्जदार 7 राज्य

  • तमिलनाडु और यूपी टॉप पर, साढ़े 6 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज
  • महाराष्ट्र पर 6 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज, पश्चिम बंगाल पर साढ़े 5 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज
  • राजस्थान पर साढ़े 4 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज, गुजरात और आंध्र प्रदेश पर करीब 4 लाख करोड़ का कर्ज

चुनाव में जीत के लिए मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के कल्चर पर सख्ती से रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देशित किया है। एडीशनल सालिसिटर जनरल की दलील पर चुनाव आयोग से भी बात करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट रुख के बाद अब मोदी सरकार इस मसले पर अब ये तीन बड़े कदम उठा सकती है।

पहला यह कि जिस तरह से चुनाव आयोग चुनावी खर्च की सीमा तय करता है, उसी तरह से वह मुफ्त सामान, सुविधाएं बांटने की घोषणा पर भी रोक लगा दे।

दूसरा कदम, केंद्र सरकार ऐसा सख्त कानून लाए जिसमें राजनीतिक दल मुफ्त सामान-सुविधाओं का वितरण सरकारी खज़ाने से करने के बजाय पार्टी फंड से ही करने को बाध्य हो जाएं।

तीसरा और सबसे बड़ा कदम यह कि सभी राजनीतिक दल नैतिक रूप से मुफ्त रेवड़ियां बांटने वाली राजनीति से खुद को स्वेच्छा से दूर रखें और जनता भी ऐसे दलों को नकार दे जो उन्हें मुफ्त सामान या सुविधाओं का लालच देते हैं।

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