सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/Mismanagement in Govt. Controlled temples:  सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के कानूनों के तहत विनियमित मंदिरों के कथित कुप्रबंधन या वहां से एकत्र धन के दुरुपयोग के याचिकाकर्ता से सबूत मांगे हैं। पीठ हिंदुओं, जैन, सिखों और बौद्धों को अपने धार्मिक स्थलों के प्रबंधन का अधिकार देने की मांग वाली याचिका पर अब 19 सितंबर को सुनवाई करेगी।

सरकार के नियंत्रण में करीब चार लाख मठ-मंदिर
याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय का कहना है कि करीब चार लाख मठ-मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं लेकिन एक भी मस्जिद, मजार, चर्च, दरगाह सरकार के नियंत्रण में नहीं है। उपाध्याय का दावा है कि मठों-मंदिरों से सरकार एक लाख करोड़ रुपए लेती है लेकिन मस्जिद, मजार, चर्च, दरगाह से कुछ भी नहीं लेती। मठों-मंदिरों को नियंत्रित करने के लिए 35 कानून हैं लेकिन मस्जिद, चर्च आदि को नियंत्रित करने के लिए एक भी कानून नहीं है। याचिका में ईसाइयों और मुसलमानों की तरह हिंदुओं, जैन, सिखों और बौद्धों को भी अपने धार्मिक स्थलों का प्रबंधन स्वयं करने का अधिकार देने की मांग की गई है। 

सीजेआई उदय उमेश ललित और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने याचिकाकर्ता भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय के वकील अरविंद दातार और गोपाल शंकर नारायणन को अतिरिक्त सामग्री दाखिल करने के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी है।

पुजारियों को पगार नहीं दे पाने पर कर्नाटक के 15000 मंदिरों में ताले

याचिकाकर्ता उपाध्याय के वकील शंकर नारायणन ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां पुजारियों को पगार नहीं दे पाने पर सरकार द्वारा नियंत्रित 15,000 मंदिरों को बंद कर दिया गया है। साथ ही मंदिरों की भूमि को खुर्द-बुर्द भी किया जा रहा है। हालांकि पीठ ने इन आरोपों को साबित करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाने को कहा है। 

सभी धर्मों के स्थलों के लिए एक जैसे हों कानून

याचिकाकर्ता उपाध्याय के दूसरे वकील दातार ने कहा, हमने पांच राज्यों के धार्मिक बंदोबस्ती अधिनियमों की वैधता को चुनौती दी है। या तो सभी धर्मों के स्थलों को सरकारी नियंत्रण में लाया जाए या फिर हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन धर्मस्थलों को भी सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए। दातार ने इन नियमों को संविधान के अनुच्छेद-25 और 26 बी के उल्लंघन बताया है जिसमें संपत्तियों के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है।

एक अन्य याचिकाकर्ता जितेंद्र सरस्वती के वकील अमन सिन्हा ने भी इसी केस में तर्क दिया कि सरकारी नियंत्रण वाले धर्मस्थलों में धन के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। इस पर पीठ ने पूछा कि क्या हेराफेरी के आरोपियों को याचिका में पक्षकार बनाया गया है? इस पर याचिकाकर्ताओं के आग्रह पर पीठ ने उन्हें 19 सितंबर को अगली सुनवाई में अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने को कहा है।

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