सत्य पथिक वेबपोर्टल/मीरगंज-बरेली/Bhagwat Katha: वृन्दावन धाम से आए प्रख्यात कथा व्यास स्वामी श्री बृजभूषणाचार्य जी महाराज ने कहा- “जिस पर भगवान का कृपामृत बरसने लगे, उसके लिए कुछ भी पाना शेष नहीं रहता। संसार का बड़े से बड़ा सुख-वैभव भी उसे तुच्छ दिखने लगता है और कोई भी डर उसे डरा नहीं पाता।”

स्वामीजी मीरगंज विकास क्षेत्र के गांव ठिरिया बुजुर्ग के श्रीराधाकृष्ण मंदिर प्रांगण में संगीतमय साप्ताहिक भागवत्कथा के छठे दिन गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न मनोहारी लीलाओं की भक्तों पर रसवर्षा कर रहे थे।

स्वामीजी ने बताया कि अक्रुरजी कंस के आदेश पर गोकुल से श्रीकृष्ण को मथुरा ले जाने आते हैं। मथुरा में भ्रमण के दौरान श्रीकृष्ण कुब्जा का उद्धार करते हैं। नारद ऋषि ने कंस को बताया था कि जब तक दरबार में शिव धनुष सुरक्षित रहेगा, आप भी सुरक्षित रहेंगे। कृष्ण ने उस धनुष को तोड़ डाला। कृष्ण-बलराम ने मल्ल युद्ध करते हुए पहले कंस के योद्धाओं को मारा और अंत में कृष्ण ने अत्याचारी कंस का वध कर कारागार से माँ देवकी पिता वसुदेव को मुक्त कराया और नाना उग्रसेन को पुन: मथुरा के सिंहासन पर विराजमान कराया। संदीपन ऋषि के आश्रम में कृष्ण-बलराम की शिक्षा-दीक्षा, और कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की कथाएं भी कथाव्यास ने भजन-कीर्तन के बीच रोचक ढंग से सुनाईं। ठिरिया बुजुर्ग और आसपास के सभी गांवों के प्रधानों और ग्रामवासियों ने मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनी। व्यासजी की मधुर वाणी से भागवत कथा में प्रतिदिन भीड़ बढ़ती जा रही है। 17 सितंबर शनिवार को भागवत कथा के समापन के बाद विशाल भंडारा भी कराया जाएगा।

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