भारत और विश्व के चुनिंदा अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की टीम ने ताजा रिसर्च में किया दावा

सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली-न्यूयार्क/Mystery of circles in Galaxy: भारतीय और विश्व के प्रमुख अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की एक टीम ने हाल ही में ऑड रेडियो सर्कल्स (ORCs) के अंतरराष्ट्रीय रेडियो टेलीस्कोप के जरिए ली गई तस्वीरों को विश्लेषण करते हुए एक शोध में खुलासा किया है कि हाल ही में अंतरिक्ष में सूर्य से भी बड़ा और भारी तारा फट गया है। यह भी दावा किया है कि गैलेक्सी में रहस्यमय धुंधले घेरे जैसी संरचना यानी सुपरनोवा ब्लैक होल के निकट फटने वाले तारे के अवशेष हो सकते हैं।

ब्रह्मांड के बड़े विस्फोट का अवशेष

स्पेस साइंटिस्ट्स की टीम का दावा है कि आकाशीय अंतरिक्ष में गहरे रेडियो उत्सर्जन के रहस्यमय धुंधले घेरे सुपरनोवा के अवशेष हो सकते हैं। ये ब्रह्मांड में सबसे बड़े विस्फोट के सूचक हैं। चौंकाने वाली यह रिसर्च करने वाली टीम में भारतीय खगोलविद भी शामिल हैं। गैलेक्सी में सुपरनोवा के अवशेष के इस दावे की पुष्टि आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज द्वारा की गई है।

सूर्य से भी 1.4 गुना बड़ा सफेद तारा

रिसर्च का नेतृत्व नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के वैज्ञानिक डॉ. अमितेश उमर ने किया है। शोध को लेकर साइंटिस्ट्स ने कहा कि ये संकेत मिलता है कि ये सूर्य के द्रव्यमान से 1.4 गुना से अधिक भारी एक सफेद बौना तारा फटा था। गैलेक्सी में दिख रहे थर्मोन्यूक्लियर सुपरनोवा के अवशेष हो सकते हैं।
10 लाख प्रकाश वर्ष दूर हुआ विस्फोट

खगोलविदों ने इस रिसर्च के लिए ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में स्क्वायर किलोमीटर एरे (SKA), भारत में ज्वॉइंट मेट्रेवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT) और नीदरलैंड में लो-फ्रीक्वेंसी ऐरे (LOFAR) का उपयोग किया। साइंटिस्ट्स का ये मानना है कि इनमें से कुछ अवशेष (सुपरनोवा ) 10 लाख प्रकाश-वर्ष दूर हो सकते हैं। ये स्पेस में मौजूद ऐसी वस्तुएं हैं जो अब भी रहस्य बनी हुईं हैं। इन्हें किसी सामान्य खगोलीय घटनाओं के जरिए नहीं समझा जा सकता।

ब्लैकहोल को पार कर गया तारा

रिसर्च को लीड कर रहे नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के वैज्ञानिक डॉ. अमितेश उमर ने ब्लैक होल तारे के विस्फोट के बाद लगे बलों का अध्ययन किया। शोध में कहा गया कि तारा आकाशगंगा में ब्लैक होल के करीब पहुंचा था। लेकिन वो ब्लैक होल में जाने पहले ही नष्ट हो गया। तारा फटने से उसका लगभग आधा द्रव्यमान ब्लैक होल से होकर बहुत तेज गति से बाहर निकल गया। ब्लैकहोल में ये डिस्टर्बेंस कोई आम नहीं है। लेकिन जब तारा फटा तो उससे भारी मात्रा में ऊर्जा निकली और तारे का लगभग आधा द्रव्यमान झटके से ब्लैक होल को पार करते हुए बाहर निकल गया।

गैलेक्सी के अंदर तारे का अवशेष

स्पेस साइंटिस्ट्स की रिसर्च के मुताबिक, इस विस्फोट से स्पेस में निकले द्रव्यमान की गति इतनी तेज थी कि वो करीब एक लाख प्रकाशवर्ष दूर तक पहुंच गया। आकाशगंगा में दिखे सुपनोवा को लेकर अनुमान लगाया गया कि ये तारे के फटने कारण उत्पन्न हुए हैं। यूके के रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी जर्नल के लेटर्स सेक्शन में प्रकाशित शोध में कहा गया कि तारे के विस्फोट के बाद ब्लैकहोल को पार कर निकला द्रव्यमान आकाशगंगाओं के बीच एक बड़े स्पेस में मिला है।

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