सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/Gyanvaapi Case: वाराणसी के चर्चित ज्ञानवापी मस्जिद और श्रृंगार गौरी मामले में मेंटेनेबिलिटी यानी पोषणीयता को लेकर आज सुनवाई होनी है। मुस्लिम पक्ष के नए वकील मधु बाबू कथित तौर पर पारिवारिक दबाव के बीच जहां इस केस से हट गए हैं; वहीं, हिंदू पक्ष के वकील कोर्ट रूम में ही आपस में भिड़ गए और नौबत मारपीट तक जा पहुंची।

मुस्लिम पक्ष ने वकील अभय नाथ यादव का पिछले दिनों दिल का दौरा पड़ने से निधन होने के बाद योगेंद्र प्रसाद सिंह उर्फ मधु बाबू को नया वकील नियुक्त किया था लेकिन मधु बाबू तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए कोर्ट नहीं पहुंचे। चर्चा है कि परिवार के लोग ही मधु बाबू पर मुस्लिम पक्ष की पैरवी नहीं करने का दबाव बना रहे थे। हालांकि, मधु बाबू के पुत्र विशाल सिंह ने बताया कि उनके पिता 75 साल के हो गए हैं। तबीयत ठीक नहीं रहती है लिहाजा वे यह केस नहीं देख पाएंगे। विशाल सिंह ने भी माना कि उनके पिता इस केस से पीछे हट चुके हैं। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया है कि मधु बाबू पर इस केस को लेकर किसी तरह का कोई पारिवारिक दबाव नहीं था।

मुस्लिम पक्ष के दूसरे वकील तौहिद खान ने कहा कि जब तक मधु बाबू के आधिकारिक तौर पर केस से हटने को लेकर कोर्ट में कोई पत्र नहीं आ जाता, तब तक यही माना जाएगा कि वे अभी भी मुस्लिम पक्ष के वकील हैं।
कोर्ट रूम में क्या हुआ?
मुस्लिम पक्ष के वकील रईस अहमद के मुताबिक, कोर्ट को बताया गया कि यह प्रॉपर्टी वक्फ की है और वक्फ में दर्ज भी है। इसलिए इस केस की सुनवाई का अधिकार भी न्यायालय को नहीं, सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल को ही है। बुधवार की सुनवाई में मुस्लिम पक्ष को आधे घंटे का वक्त मिलेगा जिसमें वह प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट एक्ट 1983 पर अपनी बहस पूरी कर लेगा।

रईस अहमद ने बताया कि सुनवाई के बाद अगली तारीख और समय को लेकर हिंदू पक्ष के वकील कोर्ट रूम में आपस में ही भिड़ गए और मारपीट तक की नौबत आ गई। ऐसा नहीं होना चाहिए था। मुस्लिम पक्ष के ही एक अन्य वकील मोहम्मद तौहिद खान ने बताया कि कोर्ट में यह दलील भी दी गई कि हाईकोर्ट ने दीन मोहम्मद के केस में अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यह संपत्ति वक्फ की है। इसमें अगर फिर से डिक्लेरेशन चाहते हैं तो आपको लखनऊ वक्फ ट्रिब्यूनल में जाना पड़ेगा न कि सिविल कोर्ट में। सवाल किया कि अगर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं थी तो आखिर उत्तर प्रदेश सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए एक्सचेंज डीड क्यों की?
आज पूरी हो सकती है सुनवाई
वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से याचिका दाखिल करने वाली चार वादी महिलाओं के वकील विष्णुशंकर जैन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की दलीलें आधे घंटे की तय मियाद में पूरी हो जाने के बाद हम जवाब देंगे। उम्मीद है कि बुधवार को ही इस मामले में सुनवाई पूरी हो जाएगी और कोर्ट फैसला सुरक्षित रख लेगा।

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