विश्व पर्यावरण दिवस पर स्मृति शेष साहित्यकार ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद,’ जी की पुण्य स्मृति में समर्पित उन्हीं के सुपुत्र उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट का एक सुंदर गीत

जीव -जंतुओं की सेवा में, जिनका जीवन रहा समर्पित
ऐसे ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी, श्रद्धा- सुमन करें हम अर्पित।

पशुपालन विभाग के गौरव, मुख्य औषधिक का पद भाया
चिड़िया घर में कितने जीवों, ने उनका संरक्षण पाया
मरणासन्न हुए बाघों को, उनके द्वारा गया बचाया
तत्कालीन एशियन सर्कस ने उनका सम्मान बढ़ाया

जो भी सोचा अपने मन में, उसके प्रति वे थे संकल्पित
देखा था उनके जीवन में, प्रेम और सद्भाव समन्वित।

भारत के प्रधानमंत्री नंदा जी ने उनको माना
बनी समितियाँ सदाचार की, मिलने का हो गया ठिकाना
दोनों में बढ़ गया प्रेम जब, सीख लिया था साथ निभाना
दोनों ने ही मानवता का, बुना यहाँ पर ताना-बाना

हुए ‘कुमुद’ जी की साहित्यिक, सेवाओं पर हम भी गर्वित
आज यहाँ अपनत्व भाव से, करते हैं हम उनको तर्पित।

गए हैदराबाद ‘कुमुद’ जी, मना जन्मदिन जुड़ा सिलसिला
कृष्ण कांत जी, बिंदु जी मिले, मन का सुंदर फूल था खिला
अन्नपूर्णा सदन साक्षी, तीन जन्मदिन उनके न्यारे
माननीय उप राष्ट्रपति बने, सज्जनता के श्रेष्ठ सहारे

अपनी कठिन साधना से ही, कई प्रदेशों में संदर्भित
जुड़ीं पाठ्यक्रम से रचनाएँ, हुई ख्याति जीवन में अर्जित।

जनसंघी नेता बलराज मधोक कभी संसद में छाए
मिला ‘कुमुद’ जी से अपनापन,वे भी उनके घर पर आए
राजनीति से दूर ‘कुमुद’जी, लेकिन कोई भुला न पाए
अपनी चिंता कभी नहीं की, मानव- मूल्य सदा अपनाए

पशु कल्याण संगठन उनका, जीवों की सेवा से चर्चित
कई पुस्तकों के सम्पादक, संघर्षों में भी थे हर्षित।

रचनाकार- उपमेंद्र सक्सेना एड०
‘कुमुद- निवास’
बरेली (उ०प्र०)
मोबा०- 98379 44187

(सर्वाधिकार सुरक्षित)

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