सत्य पथिक वेबपोर्टल/नई दिल्ली/fake call center: दिल्ली अपराध शाखा (Delhi Crime Branch) और यूपी एसटीएफ की टीमों ने दिल्ली और नोएडा में छापे मारकर हजारों करोड़ की ठगी कर चुके दो फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया है।

दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए मालिक समेत इस गिरोह के 18 ठगों को गिरफ्तार किया है। अमेरिकी सरकार से एजुकेशन लोन दिलवाने के नाम पर ये लोग 1000 से ज्यादा देशी-विदेशी लोगों से सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दे चुके हैं। पुलिस ने 20 लाख रुपये, 11 डेस्कटॉप, आठ लैपटॉप भी बरामद किए हैं। 

दिल्ली अपराध शाखा के डीसीपी विचित्र वीर ने बताया कि एसआई सीताराम को 12 जुलाई को सूचना मिली थी कि मुंडका गांव में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। इस पर एसीपी अभिनेंद्र जैन की देखरेख में इंस्पेक्टर पंकज ठकरान व एसआई सीताराम आदि की टीम गठित की गई। टीम ने दबिश दी तो यहां काम करने वाले लोग अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर रहे थे। जांच में पता लगा कि नजफगढ़ निवासी नितिन सिंह (30) कॉल सेंटर का मालिक है। वह नोएडा, यूपी निवासी दया निधि प्रसाद के साथ मिलकर कॉल सेंटर को चला रहा था। पुलिस ने कॉल सेंटर मालिक नितिन सिंह और अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। 16 अन्य आरोपी टेलीकॉलर थे। इनकी पहचान सिकंदपुर, हरियाणा निवासी  हैरी(20), जासन (26), गुरुग्राम, हरियाणा निवासी माइक तामंग (25), दिल्ली निवासी हेनरी थॉमस (30), जॉहन लोना (32), बिल्ली सीवा (29), फ्रेंसाइज (19), अलबर्ट पामे (24), जॉन (32), जैक्सन पामे (21), केविन फॉस्टर  (26), केविन लनाह (21), ट्रोय एनएस (26), जेम्स सीएस (25), तिंगबाग्वे कौरिंग  (26) और रेमंड मिजो (29) के रूप में हुई है।  

आरोपी नितिन ने पूछताछ में बताया कि वह कमल नाम के आरोपी से अमेरिकी नागरिकों का डाटा लेता था। इसके बाद टेलीकॉलर इंटरनेट के जरिये कॉल करते थे। नागरिकों से आरोपियों को जो गिफ्ट वाउचर के नंबर मिलते थे उनको रुपयों में दया कैश कराता था। 

आरोपी अमेरिकी नागरिकों को इंटरनेट कॉल करते थे। ये लोगों को कहते थे कि वह अमेरिकी सरकार के ग्रांट विभाग से बोल रहे हैं। बताते थे कि आपका चयन हायर एजुकेशन के लिए फ्री लोन के लिए हुआ है। पीड़ित जब लोन लेने के लिए तैयार हो जाता था तो ये उससे कहते कि उसे पंजीकरण कराना होगा। ये रजिस्ट्रेशन के नाम पर विभिन्न कंपनियों के वाउचर खरीदवाते थे। इसके बाद वह पीड़ित से वाउचर का नंबर पूछ लेते थे। नितिन दया के जरिये इन वाउचर्स को रुपयों में कैश करा लेता था। 

लैपटॉप-कंप्यूटर में वायरस डालकर करते थे ठगी, फूटा भांडा
उधर, नोएडा में भी लखनऊ से आई विशेष जांच दल (एसटीएफ) की टीम ने फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। ये लोग विदेशियों के लैपटॉप-कंप्यूटर में वायरस डालकर ठीक करने का झांसा देकर 170 करोड़ रुपये ठग चुके थे। सटीक मुखबिरी पर एसटीएफ ने शुक्रवार को नोएडा सेक्टर-59 स्थित बी-36 में चल रहे कॉल सेंटर से सरगना सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने अमेरिका से लेकर दुबई तक के सैकड़ाें लोगों से ठगी की है।

बताया गया कि कॉल सेंटर से वीओआईपी कॉलिंग का सर्वर लगाकर विदेशियों के लैपटॉप-कंप्यूटर में वायरस डाला जाता था। फिर टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर संपर्क कर लैपटॉप-कंप्यूटर को रिमोट पर लेकर ऑनलाइन अकाउंट से भारतीय अकाउंट में रकम ट्रांसफर कर ली जाती थी। 

यूपी एसटीएफ के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सेक्टर-44 निवासी करन मोहन, बेगमगंज गोंडा निवासी विनोद सिंह, सेक्टर-92 निवासी ध्रुव नारंग, सेक्टर-49 निवासी मयंक गोगिया, सेक्टर-15ए निवासी अक्षय मलिक, गढ़ी चौखंडी निवासी दीपक सिंह, गौड़ सिटी निवासी आहूजा पॉडवाल, दिल्ली निवासी अक्षय शर्मा, जयंत सिंह व मुकुल रावत के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से 12 मोबाइल, 76 डेस्कटॉप, 81 सीपीयू, 56 वीओआईपी डायलर, 37 क्रेडिट कार्ड समेत अन्य सामग्री बरामद की गई है। फर्जी कॉल सेंटर का नेटवर्क दुनिया के कई देशों में फैला रखा था। आरोपियों ने अमेरिका, कनाडा, लेबनान, ऑस्ट्रेलिया, दुबई से लेकर कई पश्चिमी देशों के लोगों से ठगी की है। नोएडा के कॉल सेंटर में पचास से अधिक लोग रोजाना काम कर रहे थे। बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है।

किराए के विदेशी खातों में रुपये ट्रांसफर करते थे
बताते हैं कि फर्जी दस्तावेजों से आरोपियों ने अलग-अलग नाम से कंपनियां बना रखी थीं। कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों से संपर्क कर कंप्यूटर व लैपटॉप में वायरस डालकर ठीक करने का झांसा दिया जाता था। टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर आरोपी अलग-अलग सॉफ्टवेयर से लैपटॉप-कंप्यूटर को हैक कर लेते थे और विदेशी नागरिकों के ऑनलाइन खाते या क्रेडिट कार्ड की डिटेल चुराकर किराए पर लिए गए विदेशी खातों में रुपये ट्रांसफर कर लेते थे।

हवाला के मार्फत आता था पैसा
गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि उनके पास हवाला के माध्यम से भारतीय मुद्रा में कैश आता था। किराए के अकाउंट में डॉलर में पैसे जाते थे। फिर किराए पर अकाउंट देने वाले कमीशन काटकर भारत में रुपये ट्रांसफर कर देते थे।

यह होता है वीओआईपी
वीओआईपी का मतलब वॉयर ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल होता है। यह व्हाट्स एप कॉलिंग जैसे काम करता है यानी इसकी रिकॉर्डिंग आदि नहीं होती है। यह इंटरनेट कॉलिंग है। 

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