सत्य पथिक वेबपोर्टल/बरेली/Facebook online Mushayara: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के अदबी ग्रुप शम्अ फिरोजाॅ की जानिब से मुनक्किद ऑनलाइन मुशायरे में बरेली और आसपास जिलों में अपने लाजवाब अशआर और बेमिसाल कलाम से खूब मक़बूलियत बटोरते रहे जाने-माने शायर और ग़ज़लकार विनय साग़र जायसवाल की इस ग़ज़ल को दो अवार्ड देकर नवाजा गया है। ग़ज़ल को फर्स्ट प्राइज तो मिला ही है, उसे पूरे मुशायरे की बेहतरीन ग़ज़ल का अवार्ड भी दिया गया है।

विनय साग़र जायसवाल ने इतनी इज्जत अफजाई पर ग्रुप एडमिन डॉ. शाहीन वसीह गुल और पूरी इंतजामिया कमेटी का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा किया है। इधर, श्लेष चंद्राकर –छत्तीसगढ़, गरिमा गर्ग –पंचकुला, सुनीता गर्ग–पंचकुला, डॉ.-ममता सिंह–मुरादाबाद,डॉ.–सुनीता सिंह–वाराणसी, अलका मित्तल–मेरठ, डॉ.अलका शर्मा, ग़ज़लराज –बरेली, फन्सूर जाफ़री-बरेली,रामनरेश सावन–ग्वालियर, कालीचरण निगोते, सवीना वर्मा सवी–अम्बाला, देशबंधु तन्हा–पीलीभीत, रीमा पांडेय–कोलकाता, राजेश सोढानी–इंदौर, भँवर सिह राजपूत–इंदौर, ज़ाकिर लोखंडवाला, उपजा के पूर्व मीरगंज तहसील अध्यक्ष कवि-पत्रकार गणेश ‘पथिक’
सहित बहुत से कवियों-शोरा हजरात और काव्य प्रेमियों ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विनय साग़र जायसवाल को ढेर सारी बधाइयां और मुबारकबाद दी है।

उर्दू अदब, ग़ज़ल और शायरी से मोहब्बत रखने वाले बहुत से सामईन की फरमाइश पर विनय सागर जायसवाल की दो काफियों वाली इस बेहतरीन ग़ज़ल के कुछ अशआर पेशे खिदमत हैं-

ग़ज़ल( दो काफ़ियों में)


1222–1222–1222–1222
अगरचे इक घड़ी को मेरी यह तक़दीर सो जाती
किसी की ज़ुल्फ़ ही मेरे लिये शमशीर हो जाती

कहीं भी चैन से रहने नहीं देती है यह हमको
ये तेरी याद जो हर दिन नई इक पीर बो जाती

ख़ुदी को मार ही लेते ज़रा गर हम जहां वालों
हमारी आरज़ू उस वक़्त ही रहगीर हो जाती

ये आहों की नदी बहने न दी यूँ हमने आँखों से
किताब-ऐ-दिल पे यह लिख्खी हुई तहरीर धो जाती

किसी के हुस्न की रानाइयों में यूँ नहीं डूबे
यही था डर हमें तेरी कहीं तस्वीर खो जाती

हमें भी बोलने की छूट जो कुछ आप दे देते
यक़ीनन ही मुअम्मे की वहीं तफ़सीर हो जाती

बहलने की कभी कोशिश नहीं की इसलिए हमने
ख़ुशी की मौज में यादों की वो जागीर जो जाती

हमीं ने तोड़ दी तक़दीर की ज़ंजीर ऐ-साग़र
वगर्ना उम्र भर इन्सान की तदबीर सो जाती।

शब्दार्थ:-

तफ़सीर–स्पष्टीकरण
मुअम्मा–पहेली ,रहस्य की बात
तहरीर–लेख
तदबीर–कोशिश ,जतन

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