सत्य पथिक न्यूज वेबसाइट/नई दिल्ली/Crisis in Shiv Sena: भारत निर्वाचन आयोग ने उद्धव और शिंदे गुट से 8 अगस्त तक साबित करने के लिए कहा है कि शिवसेना के असली दावेदार वही हैं। दोनों गुटों को 8 अगस्त को दोपहर एक बजे तक अपने-अपने दावे के समर्थन में सभी जरूरी प्रमाण और दस्तावेज आयोग के समक्ष पेश करने होंगे। इससे पहले एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट भी दोनों धड़ों की याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।

उद्धव ठाकरे धड़े के सांसद अनिल देसाई ने 25 जून 2022 को चुनाव आयोग को सूचित किया था कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में कुछ विधायक पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। उन्होंने किसी और के ‘शिवसेना’ या ‘बालासाहेब’ के नाम का इस्तेमाल करने पर भी आपत्ति जताई थी। तब तक ज्यादातर विधायक गुवाहाटी में एकनाथ शिंदे के साथ चले गए थे। इसके बाद जुलाई के पहले सप्ताह में अनिल देसाई ने चुनाव आयोग को तीन और पत्र लिखकर बताया था कि चार सदस्यों ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। अनिल देसाई ने 2 जुलाई को आयोग को ई-मेल किया और 25 जून को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर राष्ट्रीय कार्यकारी प्रतिनिधियों का संगठनात्मक ढांचा प्रस्तुत किया।
उधर, सीएम एकनाथ शिंदे ने 19 जुलाई 2022 को चुनाव आयोग में याचिका दायर कर उनके नेतृत्व वाले समूह को शिवसेना घोषित करने और उन्हीं के गुट को पार्टी का चिन्ह ‘धनुष और तीर’ आवंटित करने की मांग की है। शिंदे ने आयोग को बताया कि उद्धव ठाकरे गुट ने अनधिकृत बैठक कर और उन्हें हटाने के लिए 55 में से 14 मतों के अल्पमत से प्रस्ताव पारित कर उनके स्थान पर अजय चौधरी को शिवसेना विधायक दल (SSLP) का नेता भी नियुक्त कर लिया। शिंदे का दावा है कि 55 में से 40 विधायक, विभिन्न एमएलसी और 18 में से 12 सांसद भी उनके साथ हैं।

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