श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले प्रमुख विपक्षी नेता और संभावित प्रधानमंत्री साजिथ आर प्रेमदासा की पीएम नरेंद्र मोदी से भावुक अपील

सत्य पथिक वेबपोर्टल/कोलंबो/ShriLanka Crisis: श्रीलंका में 44 साल में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के बीच आज मतदान से ठीक पहले प्रमुख विपक्षी नेता और संभावित प्रधानमंत्री साजिथ आर प्रेमदासा की पीएम नरेंद्र मोदी से भावुक अपील सामने आई है।

साजिथ आर प्रेमदासा

अपने ताजा टवीट में प्रेमदासा ने लिखा है, “श्रीलंका का राष्ट्रपति जो कोई भी बने, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत की सभी राजनीतिक पार्टियों और वहां के लोगों से मेरा विनम्र निवेदन है कि इस आपदा से बाहर निकालने में आप सब मां लंका और हमारे लोगों की मदद करते रहें।”

इधर, वोटिंग से पहले दुल्लास अलहप्परुमा, विक्रमसिंघे पर बढ़त बनाते नजर आ रहे हैं। उन्हें अपनी पार्टी के ज्यादातर नेताओं के अलावा विपक्ष का भी व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है। श्रीलंका के पूर्व विदेश मंत्री जीएल पीरिस ने कहा कि श्रीलंका की सत्ताधारी पार्टी पोदुजाना पेरामुना (SLPP) के अधिकतर नेताओं के अलावा विपक्ष के नेता भी दुल्लास अलहप्परुमा को राष्ट्रपति और साजिथ प्रेमदासा को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 73 साल के विक्रमसिंघे राष्ट्रपति की रेस में अभी भी आगे चल रहे हैं। लेकिन 225 सीटों वाली संसद में बहुमत जुटाना इतना आसान भी नहीं होगा। अगर श्रीलंका में आर्थिक हालात बेहद खराब होने से पहले अगस्त 2020 की संसदीय संरचना को देखें, तो 145 की संख्या वाली SLPP पार्टी से 52 सांसद अलग हो गए थे। इस विभाजन के बाद SLPP में 93 सदस्य बचे थे। बाद में 4 सदस्यों के लौटने के बाद इनकी संख्या 97 हो गई थी। 225 सदस्यीय सदन में विक्रमसिंघे को जादुई आंकड़ा छूने के लिए 113 सांसदों का समर्थन चाहिए। अपनी पार्टी के सभी 97 सांसदों का समर्थन मिलने के बाद भी उन्हें जीत के लिए 16 अन्य सांसदों के वोटों की जरूरत पड़ेगी। विक्रमसिंघे को तमिल पार्टी के 12 सांसदों में से कम से कम 9 पर भरोसा है। इसके अलावा उनकी उम्मीदें मुख्य विपक्षी समागी जाना बालवेगया (SJB) के दलबदलुओं पर भी टिकी हैं। इनमें से ज्यादातर को विक्रमसिंघे ही राजनीति में लाए थे।

उधर, SJB के नेता साजिथ प्रेमदासा अलहप्परुमा को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं। श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (SLFP) ने भी अलहप्परुमा के पक्ष में ही वोट देने का फैसला किया है। तमिल प्रगतिशील गठबंधन (टीपीए) नेता सांसद मनो गणेशन ने कहा कि उनकी पार्टी द्वारा भी सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुनाव में अल्हाप्परुमा का ही समर्थन करने का फैसला किया गया है। श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस (SLMC) और ऑल सीलोन मक्कल कांग्रेस (ACMC) ने भी अलहप्परुमा को वोट देने का ऐलान किया है।

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