सुरेश ‘सौरभ’

कवि, लघुकथाकार एवं दलित चिंतक

सत्य पथिक वेबपोर्टल/लखीमपुर खीरी/चिंतन:

स दिन दुनिया गांधी जयंती मना रही थी। सत्य अहिंसा के पुजारी गांधी जी को नमन कर रही थी। लखीमपुर नगर के पत्रकार विकास सहाय अपने विज्ञापन व्यवस्थापक दिनेश शुक्ला के साथ लाल बहादुर शास्त्री पार्क में समाचार संकलन के लिए गये थे। बताते हैं कि वहां लखीमपुर नगर पालिकाध्यक्ष निरुपमा बाजपेई, जेई नगर पालिका संजय कुमार, सर्वेयर अमित सोनी के साथ पालिकाध्यक्ष का प्रतिनिधि रिश्तेदार शोभितम मिश्रा भी मौजूद था। विकास शास्त्री जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करती भाजपा की चेअरमैन साहिबा की फोटो खींचना चाह रहे थे। तभी गुस्से में चेअरमैन साहिबा ने कहा-मेरे खिलाफ खबर लिखते हो, यह तुम अच्छा नहीं कर रहे हो विकास? तभी उनका चेयरमैन का रिश्तेदार खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताने वाला शोभितम मिश्रा अपने मोबाइल की स्क्रीन विकास को दिखाते हुए रौब में बोला-नगर पालिका के बारे में फेसबुक पर अनाप-शनाप कविता लिखते हो? यह कहते-कहते शोभितम ने विकास को जोर से धक्का दे दिया। चटाक….विकास सिर के बल जमीन पर गिर गये, फिर वह फौरन विकास के सीने पर चढ़, विकास की गर्दन अपने गमछे से कसने लगा, साथ ही विकास को गालियां देने लगा।

चंद सेकेंडों में हुए जानलेवा हमले को विकास के साथ आए दिनेश समझ न पाए.. फौरन वह विकास को छुटाने की गरज से शोभितम की ओर दौड़े। इधर धींगामुश्ती चल रही थी, विकास की जिंदगी बचाने की, उधर चेअर मैन साहिबा और ईओ विकास को तड़पते हुए देखकर मजे ले रहे थे। अहिंसा के पुजारी गांधी जी जयंती पर चेअरमैन के उकसाने पर हिंसक हुए शोभितम के चंगुल से विकास को, दिनेश, बड़ी मुश्किल से छुटा पाए। तब शोभितम वहां से फौरन भाग लिया। इधर, विकास की गर्दन कसने से उन्हें मूर्छा आने लगी, सांसें फूलने लगीं, जोर-जोर से खांसी आने लगी। उधर कुटिल मुस्कान चेअरमैन साहिबा और ईओ के चेहरे पर बिखरती जा रही थी और लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ जमीन पर पड़ा दर्द से छटपटा रहा था। इतनी क्रूर भाजपा की चेयरमैन हो सकती है, यह चिंतनीय है। पिछले वर्ष तीन अक्टूबर को तिकुनियां में केद्रीय राज्यमंत्री अजय मिश्र टैनी के सुपुत्र आशीष मिश्र ने कई किसानों को रौंदते कर मारते हुए एक पत्रकार रमन कश्यप को भी मार डाला था। सत्तामद में चूर भाजपाइयों का खीरी जिले मेः पत्रकारों पर यह दूसरा बड़ा हमला है।

सत्ताधीशों के हिंसक हमले के भुक्तभोगी लखीमपुर खीरी के वरिष्ठ पत्रकार एवं कथावाचक विकास सहाय

विकास पर प्राणघातक हमले के बाद तमात पत्रकार सदर कोतवाली के लामबंद हुए, तब घटना के करीब के घंटे बाद प्रभारी निरीक्षक चन्द्रशेखर की त्वरित कार्यवाही के बाद आरोपी शोभितम गिरफ्तार हुआ।आई पीसी की धारा’323/504/506/151 सीआरपीसी जैसी धाराएं लगा कर आरोपी को जेल भेज दिया गया। बताते भाजपा के रसूख के दम पर शोभितम दो दिन बाद छूट गया और आजकल अपने गांव में मस्ती से विचरण कर रहा है। बकौल विकास, उन्होंने नगरपालिका के बंदरबांट पर कुछ समीक्षात्मक खबरें छापीं थीं जिससे चेअर मैन साहिबा और उनका रिश्तेदार पिछलग्गू शोभितम नाराज चल रहा था। उसके जानलेवा हमले से मैं और मेरा पूरा परिवार काफी भय के साये में जी रहा हैं, मै किस भय और मानसिक पीड़ा में खबर लिख रहा हूं यह बता नहीं सकता। तिस पर चेअर मैन साहिबा के पति तथाकथित समाजसेवी डा. सतीश कौशल बाजपेयी, मुलायम सिंह का सा संवाद दोहराते हुए मुझसे कहते हैं शोभितम बच्चा है, जाने दो, माफ कर के किस्सा खत्म करो। बच्चों से गलतियां हो जाती हैं। वे कैसे डाक्टर हैं पता नहीं? उन्हें मेरे घाव पर मरहम लगाना चाहिए जबकि वे नमक लगा रहे है। इस संदर्भ में वंचित, शोषित, सामाजिक संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, चन्दन लाल वाल्मीकि कहते हैं मैं पत्रकार विकास सहाय को, विगत 18 सालों से जानता हूं, विकास जी जन समस्याओं को निर्भीक, निडर, सच्चाई के साथ छापते हैं। एक जनप्रतिनिधि के सामने उनके साथी का, विकास पर घातक जानलेवा हमले की सभी ने निंदा की है, घटना की जानकारी होते ही कोतवाली में न्याय के लिए तमाम पत्रकारों के अलावा संभ्रांत व्यक्तियों का हुजूम, विकास की कलम की लोकप्रियता को दर्शाता है। बरेली के वरिष्ठ पत्रकार गणेश ‘पथिक’ का कहना है, यह अति निंदनीय, स्तब्धकारी और सर्वथा अस्वीकार्य है हमला है। ऐसे अवांछित व्यक्ति को लखीमपुर खीरी समेत यूपी के सभी पत्रकारों, पत्रकार संगठनों को संत पुरुष विकास के विरुद्ध अशिष्ट बर्ताव करने वाले शोभितम पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लि‌ए सभी पत्रकारों को लामबंद होकर आंदोलन करने की जरूरत है।
शोध छात्र युवा कवि विजय बादल, विकास पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहते हैं, “पत्रकार एवं साहित्यकार जनता की आवाज़ होते हैं, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार विकास चन्द्र सहाय जी के साथ हुई अभद्रता जनता की आवाज़ दबाने का कुत्सित प्रयास लगती है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करते हुए इस असंवैधानिक कृत्य की जितनी भर्त्सना की जाए, कम है‌।

पत्रकार विकास सहाय पर हमले का आरोपी शोभितम मिश्रा (लाल घेरे में)

बुजुर्ग शिक्षाविद् सत्य प्रकाश ‘शिक्षक’ कहते हैं-मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। एक मीडिया ही है, जिसके माध्यम से सबको सच्चाई का पता चलता है, अतः मीडिया से जुड़े हर व्यक्ति का सम्मान करना हर नागरिक का प्रथम कर्तव्य है‌। दैनिक जागरण के लब्ध प्रतिष्ठित पत्रकार एवं शायर विकास सहाय, जो निहायत सीधे और सरल व्यक्तित्व के धनी हैं, हमेशा अपने कर्तव्यों पर अडिग रहने वाले जुझारू व्यक्तित्व हैं। ऐसे व्यक्ति पर ‘वार्ड नामा’ स्तंभ के कारण हाथ उठाना, मारपीट करना ,गला दबाना, शोभितम की कायराना हरकत है। आरोपी को ऐसा दंड मिले जो पूरे देश में मिसाल बने।

शिक्षक राजकिशोर गौतम और कवि रमाकांत चौधरी ऐसी घटनाओं को बाबा साहब के संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की आजादी पर किया गया हमला बताते हैं। खीरी के वरिष्ठ पत्रकार सत्य कथा लेखक साजिद अली चंचल इस मामले में कहते हैं ,लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की स्वतंत्रता पर प्रहार करने का घिनौना खेल खेलने से बाज नहीं आ रहें हैं भ्रष्टाचारी। लखीमपुर खीरी के निडर निर्भीक पत्रकार विकास सहाय के साथ, जो जुल्म की होली खेलकर उनकी (पत्रकारिता की) आवाज को दबाने का प्रयास नगर पालिकाध्यक्ष के प्रतिनिधि द्वारा किया गया, घोर निंदनीय एवं अक्षम्य है। ऐसे बेहद संवेदनशील मामले में सीएम योगी जी को हस्तक्षेप करते हुए फौरन कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करानी चाहिए ताकि अभिव्यक्ति की आजादी बची रहे।

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