सत्य पथिक वेबपोर्टल/लखनऊ/transfer-posting scam-3 big ministers in anger: उत्तर प्रदेश में सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन बाद ही ट्रांसफर-पोस्टिंग के बड़े घोटाले का भंडाफोड़ होने पर मुख्यमंत्री को जहां खूब वाहवाही मिल रही है, वहीं ‘चहेते’ अफसरों पर निलंबन और कानूनी कार्रवाई की गाज गिराकर उन्होंने अपने ही डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और जितिन प्रसाद समेत तीन कद्दावर मंत्रियों को नाराज़ भी कर दिया है। तीनों कोपभवन में चले गए हैं। तीसरे राज्य मंत्री दिनेश खटीक के तो इस्तीफा तक दे डालने की चर्चाएं हैं।

नाराजगी की वजह भी साफ है। जिन विभागों में अधिकारियों के तबादलों में भारी अनियमितताओं और मनचाही पोस्टिंग दिलवाने के एवज में करोड़ों की उगाही का गोरखधंधा उजागर हुआ है, उनमें से स्वास्थ्य विभाग की कमान डिप्टी सीएम बृजेश पाठक, लोक निर्माण विभाग की जितिन प्रसाद और जल शक्ति मंत्रालय की दिनेश खटीक संभाल रहे थे। स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग में हुए तबादलों पर सीएम योगी ने जांच बैठा दी है। जलशक्ति मंत्रालय में भी तबादलों में बड़ी हेराफेरी की की बात भी सामने आ रही है।

जितिन प्रसाद क्यों हैं खफा-खफा?
जितिन प्रसाद के मंत्रालय लोक निर्माण विभाग में 350 से अधिक इंजीनियर्स का तबादला हुआ था। इनमें करीब 200 अधिशासी अभियंता और डेढ़ सौ से अधिक सहायक अभियंता हैं। तबादलों पर सीएम योगी ने न सिर्फ जांच बैठाई है, बल्कि भारत सरकार से प्रतिनियुक्ति पर आए अपर सचिव जितिन प्रसाद के ओएसडी अनिल कुमार पांडेय के खिलाफ भी सरकार ने विजिलेंस जांच और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर दी है।

कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और योगी सरकार में मंत्री बनाए गए जितिन प्रसाद के पीडब्ल्यूडी विभाग में हुए ऐसे अधिकारियों तक का तबादला कर दिया गया, जो जीवित भी नहीं हैं। जूनियर इंजीनियर घनश्याम दास का तबादला झांसी कर दिया गया जबकि उनका तीन साल पहले ही निधन हो चुका है। इसी तरह से राजकुमार का तबादला इटावा से ललितपुर जिले में हो गया जबकि इस नाम का कोई शख्स इटावा या ललितपुर में विभाग में है ही नहीं। कई कर्मचारियों का तबादला रिटायरमेंट से एक-दो साल पहले बहुत दूर कर दिया गया।
जितिन प्रसाद नाराज तो हैं, लेकिन उन्होंने नाराजगी जाहिर नहीं की है। हालांकि इसी मुद्दे पर मंगलवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात कर तबादलों पर अपनी बात रख सकते हैं।

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के विभाग में ट्रांसफर का ‘खेल’
योगी सरकार में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक साल 2017 के चुनाव से पहले बसपा छोड़कर बीजेपी में आए थे। स्वास्थ्य विभाग में भी मनमाने ढ॔ग से हुए तबादलों पर काफी आपत्तियां आईं थीं। इन तबादलों पर खुद मंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद से जवाब भी तलब किया था। सीएम योगी ने उनके विभाग के तबादलों पर भी जांच बैठा दी है।

दिनेश खटीक आखिर क्यों नाराज?
जल शक्ति मंत्री दिनेश खटीक भी नाराज बताए जा रहे हैं। राज्यमंत्री होने के बावजूद अधिकारी उनकी नहीं सुनते। कई तबादलों की लिस्ट दी थी लेकिन अधिकारियों ने उनसे कैबिनेट मंत्री से बात करने को कह दिया। चर्चा है कि दिनेश खटीक ने सीएम को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और कहीं अज्ञात स्थान पर जा चुके हैं. हालांकि, सरकार ने इस्तीफे का खंडन किया है।मेरठ के हस्तिनापुर से दूसरी बार विधायक चुने गए और लगातार दूसरी बार मंत्री बनाए गए खटीक मंगलवार को कैबिनेट की मीटिंग में भी नहीं पहुंचे थे। किसान भवन में ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह की बैठक को बीच में ही छोड़कर चले गए। तबादलों को लेकर खींचतान हुई थी। उन्होंने सरकारी गाड़ी और सुरक्षा भी छोड़ दी है।

सीएम योगी की मंत्रियों को सख्त नसीहत
कई विभागों में भ्रष्टाचार पर अफसरों पर गाज गिराने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों को भी सख्त नसीहत दी है कि वे अपने दफ्तर और निजी स्टाफ पर आंखें मूंदकर भरोसा ना करे। लगातार पैनी नज़र रखें। मंगलवार को लोक भवन में कैबिनेट मीटिंग में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करें। भ्रष्टाचार और अनियमितता की एक भी घटना को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फाइल पर जल्दबाजी में दस्तखत न करें। कोई भी फैसला मेरिट के आधार पर ही करें। कि कैबिनेट मंत्रियों को भी अपने राज्य मंत्रियों के साथ समन्वय रखने, विभागीय कामकाज में उनका सहयोग लेने और अनिवार्य रूप से बैठकों में शामिल करने के निर्देश दिए हैं।
 

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